2019 लोकसभा चुनाव (मधुबनी लोकसभा सीट :- एक विश्लेषण )


मधुबनी लोकसभा सीट  :-   एक विश्लेषण ।  
नम्बर :-  06

     बात की शुरुआत करते है मधुबनी लोकसभा सीट से । अभी मधुबनी लोकसभा के वर्तमान सांसद - ‘हुकुमदेव नारायण यादव’ (BJP) है, जिन्होंने - 2009 और 2014 में लगातार दो बार RJD के उम्मीदवार अब्दुल बारी सिद्दीक़ी को 9,927, और 20,535 मतों से हरा कर संसद भवन पहुँचे है ।  

     सिद्दीक़ी की लगातार हार को देखते हुए इस बार (2019) में RJD ने मधुबनी सीट अपने सहयोगी गठबंधन VIP को दे दिया है । ऐसे में पार्टी के वफ़ादार, हाँ- में हाँ मिलाने वाले और ‘बहेरा’ एवं ‘अलीनगर’ विधान सभा (जो दरभंगा लोकसभा के अंतर्गत आता है) से 7 बार विधायक रहे सिद्दीक़ी साहब को दरभंगा लोकसभा सीट से RJD ने टिकट दे दिया है । ऐसी स्थिति में दरभंगा लोकसभा का टिकट की आस लगाए बैठे अशरफ़ अली फ़ातमी को निराशा हुई है । फ़ातमी 4 बार “दरभंगा-लोकसभा” से RJD के टिकट पर संसद भवन जा चुके हैं । ऐसे में RJD पार्टी के इस क़दम से वे खासे नाराज़ चल रहे हैं ।  

     इन सब प्रकरण में यह नही भूलना चाहिए कि - मधुबनी-लोकसभा सीट से कोंग्रेस के मज़बूत नेता डाo शकील अहमद ने हुकुमदेव नारायण को 1994 और 2004 में दो बार हार का मज़ा चखाया था । ऐसे में मधुबनी-लोकसभा सीट से कोंग्रेस नेता  डाo शकील अहमद की दावेदारी बनती है । बिहार में (कोंग्रेस+RJD) का गठबंधन है और पिछले 2 चुनाव से इस सीट पर चूँकि - RJD अब्दुल बारी सिद्दीक़ी को खड़ा कर रही थी इसलिए शकील अहमद इस सीट पर अपनी दावेदारी नही करते थे । परंतु इस बार सिद्दीक़ी के दरभंगा जाते ही शकील अहमद मधुबनी लोकसभा पर अपनी नज़र गड़ाए हुए थे पर ये सीट अभी महागठबंधन की तरफ़ से VIP के ‘बद्रीनाथ पूर्व’ की झोली में नज़र आ रही है । 

     ऐसी स्थित में शकील अहमद कोंग्रेस से इस्तीफ़ा दे कर निर्दलीय रूप में मधुबनी लोकसभा से ताल ठोकने का मन बना चुकें हैं । यहाँ एक बात ध्यान देने योग्य है कि - 4 बार से मधुबनी के सांसद रह चुके BJP के क़द्दावर नेता हुकुमदेव नारायण यादव इस बार चुनाव नही लड़ रहे है । इस बार NDA की तरफ़ से मधुबनी सीट की दावेदारी कर रह रहे है :- ‘अशोक कुमार यादव’ । 

मधुबनी लोकसभा पर एक नज़र :- 
मधुबनी लोकसभा दरभंगा डिविज़न के अंतर्गत आता है । इसके अंतर्गत दरभंगा, मधुबनी और समस्तीपुर नामक तीन ज़िला और इन्ही नामों से 3 लोकसभा क्षेत्र है । मधुबनी लोकसभा के अंतर्गत हरलाखी, बेनिपट्टी, बिस्फी, मधुबनी, केवटी और जाले नामक 6 विधान सभा आते हैं । मधुबनी लोकसभा से दो बार (1998 & 2004) संसद पहुँचने वाले कोंग्रेस नेता शकील अहमद बिस्फी विधान सभा से तीन बार (1985,1990,2000) विधायक रह चुके हैं । 
2009 और 2014 लोकसभा में मधुबनी सीट RJD में खाते में जाने से शकील अहमद ने अपनी सीट RJD नेता अब्दुल बारी सिद्दीक़ी को दे दिया और सिद्दीक़ी लगातार दोनो बार हुकुमदेव नारायण यादव से चुनाव हार गए  । 
मधुबनी के अंतर्गत आने वाले 6 विधान सभा पर रिपोर्ट :- 
1. पहले विधान-सभा ‘हरलाखी’से - यादव, मुस्लिम और ब्राह्मण प्रत्याशी की दावेदारी रही है, अभी वर्तमान में हरलाखी के RLSP के विधायक सुधांशु शेखर ने कोंग्रेस के मोहम्मद शब्बीर को हराया है । 
2. दूसरे विधानसभा बेनिपट्टी में - झा और यादवो का वर्चस्व रहा है, अभी वर्तमान विधायक - कोंग्रेस के - भवाना झा हैं जिन्होंने BJP के विनोद नारायण झा को हराया है । 
3. तीसरा विधानसभा बिस्फी जो कि मुस्लिम बहुल इलाक़ा है - यहाँ अधिकतर मुस्लिम प्रत्याशी पहले स्थान पर एवं ठाकुर प्रत्याशी दूसरे स्थान पर रहते हैं । अभी वर्तमान में RJD के फ़ैयाज़ अहमद ने RLSP के मनोज कुमार यादव को हरा कर विधायक के पद पर आसीन हैं । 
4. चतुर्थ विधानसभा मधुबनी से - महतो और महासेठ जाति के उम्मीदवार का दबदबा रहा है , अभी वर्तमान में RJD नेता समीर कुमार महासेठ ने BJP नेता रामदेव महतो को हरा कर विधायक की कुर्सी पर विराजमान हैं । 
5. पाँचवा विधानसभा केवटी में - मुस्लिम और यादव वोटरों से लेकर प्रत्याशी तक ज़बरदस्त पकड़ है, अभी वर्तमान में - RJD नेता और दरभंगा के अली अशरफ़ फ़ातमी के पुत्र फ़राज़ फ़ातमी ने BJP के अशोक कुमार यादव को हरा दिया है । पिछली बार फ़राज़ फ़ातमी बहुत कम वोट से अशोक यादव से हार गए थे. 
6. छठे विधानसभा जाले में - हिन्दू स्वर्ण जाति  मिश्रा और पंडित की बहुलता है, इसके अतरिक्त कुछ यादव और कुछ मुसलमान वोटर भी है, अभी वर्तमान में यहाँ से विधायक का पद BJP के जिबेश कुमार के खाते में है जिन्होंने JDU के ऋषि मिश्रा को पटखनी दिया है । 

मधुबनी जिले के सभी 6 विधान सभा के मतदाता, उम्मीदवार, जाति का झुकाव और नतीजे को देखने के बाद - मधुबनी लोकसभा सीट के रूप में मूल्यंकान करने पर यहाँ मूलतः - यादव, मुस्लिम, महतो, महासेठ एवं स्वर्ण हिंदुओं में झा एवं मिश्रा की बहुतायत संख्या हैं । इसके अतरिक्त अनुसूचित जाति एवं अति- पिछड़ा वर्ग के मतदाता भी यहाँ मौजूद है । मधुबनी लोकसभा में कुल इतना - वोटर है । यहाँ मज़बूत त्रिकोणीय एवं अधिक उम्मीदवार होने पर 1 लाख 75 हज़ार वोट का प्रयास एवं दो लोगों के कड़े मुक़ाबले में 3 लाख पचास हज़ार से अधिक वोट का प्रयास ही जीत की दहलीज़ पर खड़ा कर सकता है ।   

     इस लोकसभा सीट पर स्वर्ण हिन्दू की पकड़ का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि - वर्ष 1996 एवं उससे पूर्व इस सीट पर स्वर्ण हिन्दू (झा एवं मिश्रा) का पूर्ण स्वामित्व था । उस वक़्त बिहार में जाति- व्यवस्था ऐसे चरम पर थी कि - सवर्ण हिंदुओ के अतरिक्त अन्य जात एवं मुस्लिम दबे, कुचले एवं वंचितो के रूप में समाज के हाशिए पर नज़र आते थे ।  

मूल्याँकन :-

(2014 & 2009) लगातार दो बार मधुबनी लोकसभा सीट से हुकुमदेव नारायण यादव से हारने के बाद अब्दुल बारी सिद्दीक़ी साहब को मधुबनी सीट की जगह दरभंगा लोकसभा सीट से RJD अपना उम्मीदवार बनाती है । इसके लिए दरभंगा सीट से RJD के सम्भावित उम्मीदवार अशरफ़ अली फ़ातमी का टिकट काट दिया जाता है । बेशक, RJD के इस फ़ैसले से फ़ातमी साहब नाराज़ देखे जा सकते हैं । फ़ातमी 3 बार RJD के टिकट पर दरभंगा लोकसभा सीट से सांसद बन कर लोकसभा जा चुके हैं । ऐसे में उन्हें इस बार भी RJD से काफ़ी उम्मीदें थी ।

     यादव एवं मुस्लिम वोट की संख्या का ही कमाल है कि - पिछले दो लोकसभा चुनाव से BJP के हुकुमदेव नारायण यादव की जीत हो रही है एवं RJD के मुसलमान उम्मीदवार (अब्दुल बारी सिदिकी) का स्थान दूसरा रहा है । इसके अतरिक्त जब भी कोंग्रेस के मुस्लिम उम्मीदवार डाo शकील अहमद पहले स्थान पर पहुँचे हैं तो दूसरा स्थान BJP के हुकुमदेव नारायण यादव को मिला है । निसंदेह BJP के उम्मीदवार होने के कारण यादव के अतरिक्त स्वर्ण हिंदुओ के मत का झुकाव हुकुमदेव नारायण यादव की तरफ़ रहा है और कोंग्रेस एवं RJD के उम्मीदवार होने के नाते मुस्लिम के अतरिक्त अनुसूचित जाति और अति-पिछड़ा वर्ग का वोट शकील अहमद और अब्दुल बारी सिद्दीक़ी की तरफ़ रहा है । 

यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि - RJD से टिकट मिलने और लालू के माई (M-Y) समीकरण के बाद भी अब्दुल बारी सिद्दीक़ी साहब, यादव वोटर को अपनी तरफ़ खींचने में पूर्ण रूप से सफल नही सके और हुकुमदेव नारायण यादव ने दोनो ही बार RJD के अर्थात् लालू के सिद्दीक़ी साहब को पटखनी देने में सफल रहे । यहाँ यह भी ध्यान देना होगा कि - BJP ने इन 10 से 15 वर्षों में अपने वोटर श्रेणी में अनुसूचित जाति और अति-पिछड़ा वर्ग के मतदाता को शामिल करने में बहुत हद तक सफल रहे हैं, साथ ही हुकुमदेव नारायण ने यादव होने के बल पर यादव वोटर और कार्य-कुशलता के बल पर सामान्य वोटर को अपनी तरफ़ आकर्षित करने में सफल रहे । 

इस बार :- लोकसभा 2019 का खेल 

इस बार BJP तो दौड़ में है पर हुकुमदेव जी राजनैतिक सन्यास पर जा चुके हैं अतः NDA की तरफ से भाजपा के उम्मीदवार - ‘अशोक कुमार यादव’  ने अपनी उम्मीदवारी दर्ज करवायी है और महागठबंधन की तरफ़ से मधुबनी सीट RJD ने ना तो अपने सिद्दीक़ी को दिया और ना ही कोंग्रेस के शकील अहमद को दिया बल्कि इसे  VIP के ‘बद्रीनाथ पूर्व’ को दे दिया है । यही मूल वजह है कि - डाo शकील अहमद ने कोंग्रेस से स्तीफ़ा देकर यहाँ से निर्दलीय पर्चा भरने का मन बना लिया है । इधर RJD ने सिद्दीक़ी साहब की उम्मीदवारी दरभंगा लोकसभा से दर्ज करवा दिया है। अतः यदि, डाo शकील अहमद निर्दलीय पर्चा भरते हैं तो यहाँ BJP के ‘अशोक कुमार यादव’, महागठबंधन की तरफ़ से VIP के ‘बद्रीनाथ पूर्व’ और निर्दलीय रूप में डाo शकील अहमद के बीच मज़बूत महा-संग्राम होने वाल है । 
     अब देखना यह है कि - स्वर्ण हिन्दू वोटर एवं मोदी के समर्थक BJP की तरफ़ रूक करने की संभावना रखेंगे, BJP के यादव उम्मीदवार यादव मतदाता को भी अपनी तरफ़ लाने का प्रयास करेंगे । RJD (लालटेन) से बँधे हुए यादव और मुस्लिम VIP की तरफ़ बढ़ेंगे और महागठबंधन के ‘बद्रीनाथ पूर्व’ को VIP पार्टी के आधार पर सहनी और निषाद वोट भी मिलने की सम्भावना होगी । साथ ही डाo शकील अहमद भी मुस्लिम वोटर को तो अपनी तरफ़ खीचने का प्रयास करेंगे साथ ही देखना यह है कि - वो अपने पुराने एवं ईमानदार छवि के आधार पर कितने मतदाता को आकर्षित कर पाते है ??? 

     अतः तीनो उम्मीदवार के पास अपने- अपने मज़बूत और कमज़ोर पक्ष है । यदि मुक़ाबला शकील अहमद के बिना होता है तो - भाजपा के ‘अशोक कुमार यादव’ और VIP के ‘बद्रीनाथ पूर्व’ के बीच कड़ी टक्कर होगी । वर्तमान सीट भाजपा के पास है पर भाजपा के पास वर्तमान सांसद हुकुमदेव जी जैसा ज़बरदस्त अनुभव नही है । 


नतीजा तो भविष्य के गर्भ में हैं


मिलते है अगले लेख में जहाँ - “दरभंगा”लोकसभा भ्रमण करने चलेंगे


आपकाप्रिय, 
डाo मोहम्मद अली 
राजनैतिक एवं सामाजिक विश्लेषक । 
सहायक प्राचार्य, पाटलिपुत्र यूनिवर्सिटी, पटना । 

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