C.A.B & N.R.C
(Citizenship Amendment Bill & National Register of Citizenship)

इस मुद्दे पर क़लम उठाते वक़्त मुझे (आज से 540 ईसा पूर्व) महात्मा बुद्ध के काल की एक घटना याद आ गयी । संक्षेप में उसका ज़िक्र कर रहा हूँ । महात्मा बुद्ध से जब भी जब भी ईश्वर, आत्मा, स्वर्गऔरनर्कसे जुड़े प्रशन पूछा जाता था तो वो हमेशा मौन (चुप) रहते थे । इन मुद्दों से जुड़े किसी प्रशन का उत्तर उन्होंने नही दिया । इस पर उनका कहना था कि - “ जब इंसान पहले ही अपने दुःखों से इतना परेशान, इतना त्रस्त है, तो पहली प्राथमिकता है इनके दुःखों को दूर करने का प्रयत्न करना न कि - ईश्वर, आत्मा, स्वर्ग- नरकसे जुड़े प्रश्नों पर अपना वक़्त और अपनी ऊर्जा बर्बाद करना॰” उन्होंने ऐसे प्रशन को “अनिर्वाचनीय प्रशन”कहा था । 

आज हमारे देश को ‘महात्मा बुद्ध’ के उस ‘वक्तव्य’ को याद करने का और उसे दोहराने का सबसे सटीक समय है । एक तरफ़ देश का नागरिक रोज़ी- रोटी के लिए परेशान है, भुखमरी का शिकार है, भ्रष्टाचार का बोलबाला, रहने को घर नही, पहनने को कपड़ा नही, बहनें-बेटियाँ दिन में सुरक्षित नही, धर्म के नाम पर मार-काट, मस्जिद-मंदिर, गाय-गोबर, लव-जिहादजैसी समस्या से देश झुलस रहा है और ऐसी स्थिति में ‘CAB’ और ‘NRC’ जैसे मुद्दे (जिसक प्रत्यक्ष संबंध देश के किसी भी नागरिक के मौलिक समस्या से नही है) पर सड़क से संसद और Facebook से Twitter तक बहस हो रही है, तो क्या ऐसी स्थिति में पूरे देश को ‘महात्मा बुद्ध’ की तरह “मौन”नही हो जाना चाहिए ??? आज पूरे देश को एक जुट हो कर ऐसे मुद्दों को “अनिर्वाचनीय”कहना चाहिए और इसे सिरे से ख़ारिज कर देना चाहिए । 

लोकतंत्र में असहमति का स्वागत होना चाहिए, अतः मेरे वैसे मित्र जो मेरी इस बात से सहमत नही है उन्हें मैं तर्क से समझना चाहता हूँ कि - क्यूँ, आपको इस मुद्दे को ख़ारिज कर देना चाहिए ।  
(संक्षेप में लिखने का प्रयास करता हूँ)

CAB से पहले NRC :-

सबसे पहले यह समझना होगा कि - इस मुहिम की शुरुआत CAB से नही बल्कि NRC से हुई ।  अतः CAB तक पहुँचने के लीय NRC के level को समझना बेहद ज़रूरी है :- 


NRC (National Register Citizenship) का पूरा इतिहास आसान भाषा में समझें :-   
(Question- Answer mode)

प्रशन :- NRC क्याहै  ?  

उत्तर :-  बिनाvisa /(या कोई ठोस काग़ज़) लिए बांग्लादेश से लाखों लोग (मुसलमान+हिन्दू) ग़रीबी, भुखमरी की वजह से काम की तलाश में अपनी सीमा पार कर के असम में आने लगे । इससे असम राज्य की जनसंख्या का अनुपात अचानक से बढ़ने लगा । सीमा पार से आने वाले बांग्लादेशी लोग (मुसलमान+हिन्दू) ने ख़ुद को छोटे-मोटे कार्यों/रोज़गारों में व्यस्त कर लिया और अपने रोज़ी-रोटी में लग गए । इसका सीधा प्रभाव असम में पहले से रह रहे भारतीय (हिन्दू+मुसलमान) की रोज़ी रोटी पर पड़ने लगा । असम में पहले से रह रहे भारतीय (H+M) को लगने लगा कि - ऐसा चलता रहा तो हमें अपने ही राज्य में रोज़ी-रोटी पर और कार्यों की तलाश पर आफ़त आने लगेगी ।  
Theory :- Demand and Supply
(असम में Supplyअधिक हो गया तो Demandकम होने लगा)

फिर क्या हुआ ? 

      होना क्या है, बवाल मचा, आंदोलन हुआ । असमी (H+M) और बांग्लादेशी (M+H) के बीच मार-काट मचा । माहौल तनावपूर्ण रहने लगा ॰॰॰॰॰॰॰॰

फिर क्या हुआ ? 

फिर, Assam Accord हुआ (15 Aug 1985) :- 
देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री “राजीव-गांधी” ने आंदोलनकारियों के साथ एक समझौता किया । इस समझौते का   नाम - Assam Accord  । 
इसमें यह तय हुआ कि - “विदेशी नागरिक बाहर जाएँगे” । “विदेशी नागरिक”, शब्द पर ग़ौर कीजिए । जी हाँ, “विदेशी नागरिक” (हिंदू +मुसलमान) दोनो ।
24 March 1971 के बाद जो भी नागरिक बांग्लादेश से या कहीं और से आएँ है वो - “विदेशी-नागरिक” कहलाएँगे चाहे वो किसी भी धर्म के हो । 

फिर क्या हुआ ? 

      सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर - एक सूची (List) बनाने की क़वायद शुरू हुई, जिसमें असम में रहने वाले सभी भारतीय नागरिकों (H+M) के नाम शामिल किए जाएँगे । उस सूची के आधार पर भारतीय नागरिक और बांग्लादेश से आए लोग के बीच के पहचान सम्भव हो सके । ये list जिस Registerमें अंकित होगी, उसी Register को NRC (National Register Citizenship)  कहते हैं । 
       
NRC लाने के पीछे की वजह :- 

Ø  असम में रहने वाले भारतीय नागरिकों की सूची बन जाने से बांग्लादेशी और भारतीयों की पहचान सम्भव हो सकेगी । 
Ø  भारतीय नागरिक (असम के) ख़ुद को सुरक्षित महसूस करेंगे । 
Ø  उन्हें रोज़ी-रोटी के उचित अवसर मिलेंगे । 
Ø  विदेशियों (बंगलादेशियों) की पहचान होने के बाद, उनको लेकर सरकार की तरफ़ से कोई उपयुक्त क़दम उठाया जा सकता है ।   

इन सब उद्देश्य को पूरा करने के लिए अब तक NRC के तीन (3) ड्राफ़्ट आ चुके हैं :- 

1stDraft :- NRC का पहला ड्राफ़्ट  31 Dec 2017 को जारी किया गया ।  

2ndDraft :- NRC का दूसरा ड्राफ़्ट  30 July 2018 को जारी किया गया । 

3rdDraft :- NRC का तीसरा और अंतिम ड्राफ़्ट 31 Aug 2019को जारी किया गया । 

अंतिम ड्राफ़्ट के बाद के नतीजे :-  { Ref – India Today (31 Aug 2019) }

      Prateek Hajela, state Coordinator, NRC के शब्दों में:- “NRC की सूची में अब तक 3,11,21,004 (तीन करोड़, इग्यारह लाख, इक्कीस हज़ार, चार)लोग शामिल कर लिए गए हैं और 19,06,657 (19 लाख 06 हज़ार 657) लोगों के नाम इस सूची में शामिल नही किए जा सके क्यूँकि उनके पास वो काग़ज़ नही थे जिसके आधार पर उनका नाम सूची में जोड़ा जा सके॰”  

      Prateek Hajela, आगे बताते है कि - “यह तीसरा और अंतिम ड्राफ़्ट 30 JULY 2019 को जारी किया गया था जिसमें ‘40 लाख’लोगों के नाम सूची में नही थे । उस वक़्त माहौल बहुत ख़राब हो गया था क्यूँकि बहुत सारे लोग जो सच में ‘भारतीय’ थे उनका नाम छूट गया था । पर अभी वर्तमान में लगभग ‘20 लाख’लोगों का नाम इसमें नही है, जिनके पास काग़ज़ नही है । 

आशा है, आप सभी साथी NRC को एक-हद तक समझ गए होंगे । अब आगे बढ़ते हैं॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰

आगे की बात शुरू करने से पहले आपके मन में कुछ प्रशन आ रहा होगा :- 


  1. ·              ये 20 लाख लोग, जिनका नाम NRC list में नही आया है, इनका क्या होगा ?
  2. ·            क्या, सच में ये 20 लाख लोग भारत के नागरिक नही है ? 
  3. ·            क्या ऐसा नही हो सकता है कि - ये भारत के नागरिक हो पर इन ग़रीब लोगों के पास दिखलाने के लिए कोई ‘प्रमाण-   पत्र”  नही हो ? 
  4. ·        क्या ऐसा नही हो सकता है कि - NRC बनाने वाले लोग से कुछ ग़लती हो गयी हो और इनका नाम list में नही आया होगा ?
  5. ·       क्या ऐसा नही हो सकता है कि - इनके “प्रमाण-पत्र” पलायन करने की वजह से या बाढ़, भूकम्प, आग जैसे आपदा में बर्बाद हो गया हो ? 
    इंसान होने के नाते ये सभी प्रशन हमारे दिमाग़ में आ सकते हैं पर भावनाओं से देश नही चलता है अतः - सही प्रमाण-पत्र जमा नही करने के कारण हमें यह स्वीकार करना होग कि - ये लगभग “20 लाख” लोग जिसमें “हिन्दू और मुस्लिम” दोनो है ये लोग भारतीय नही है । इनका नाम NRC की लिस्ट में नही है अतः इन्हें भारतीय नागरिकता नही मिलेगी । 

            यहीं से शुरू होती है वर्तमान सरकार की समस्या और शुरू होती है CAB की दास्ताँ(कहानी)॰ 

CAB (Citizenship Amendment Bill)

 जैसा आप लोग जान चुके है कि - NRC की List में असम में रहने वाले लगभग ‘20 लाख’लोगों के नाम शामिल नही हुए । इन ‘20 लाख’ में हिन्दू और मुसलमान दोनो है । अतः - यदि इन पर कोई यातना, कोई कार्यवाही होगी या इन्हें देश से बाहर करने वाला कोई बड़ा फ़ैसला लिया जाएगा तो - यह फ़ैसला मुसलमानो के साथ साथ उन हिंदुओं पर भी लागू होगा जो NRC की लिस्ट में नही है । ऐसा संकेत मिलते ही असम समेत पूरे देश में हंगामा मंच गया । यही कारण है कि - NRC का और NRC के नतीजे (20 लाख list से बाहर)की आलोचना असम के BJP के मंत्री और नेता करने लगे । इसका मुखर विरोध न केवल मुस्लिम बल्कि हिन्दू संगठन, हिन्दू नेता और यहाँ तक की भाजपा के नेता भी ज़ोर-शोर से करने लगे । ऐसा माहौल देखते हुए देश के प्रधान-मंत्री और गृह-मंत्री के होश उड़ गए । उन्हें लगने लगा कि - “जिस हिन्दू वोट-बैंक” की राजनीति ही हमारे पार्टी का आधार है, यदि वही हमसे नाराज़ हो जाएगा तब तो हम सड़क पर आ जाएँगे । अब उनके पास दूसरा कोई उपाय नही सूझ रहा था क्यूँकि - ‘20 लाख’में तो मुसलमान के साथ-साथ हिन्दू का भी नाम शामिल था । अतः NRC से बाहर के लोगों के साथ कोई भी फ़ैसला लिया जाएगा तो ये दोनो धर्मों के लोगों पर लागू होगा ।

“ CAB के पीछे का शैतानी दिमाग़ ” 
  
      ऐसी विषम परिस्थित से निपटने के लिए, जनाब - अमित-शाह और उनकी टीम ने CAB को न केवल जन्म दिया बल्कि इसके साथ एक ख़तरनाक शर्त जोड़ दिया । 

CAB को लेकर अमित शाह क्या बोले  :- इन्होंने कहा कि - पाकिस्तान, बंगलदेश और अफ़ग़ानिस्तान में रह रहे हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी इत्यादि जो अल्पसंख्यक है वो इस देश में आ सकते हैं, हम उन्हें भारत की नागरिकता देने के लिए तैय्यार है । केवल मुसलमान के लिए यह क़ानून नही लागू होगा । मतलब जो विदेश से मुसलमान आएँगे उन्हें हम CAB के अंतर्गत शामिल नही करेंगे, उन्हें हम भारत की नागरिकता नही देंगे । 

अमित जी का तर्क :- ये जो तीन हमारे पड़ोसी मुल्क है, इन देशों में मुस्लिम बहुसंख्यक है, अतः उनके साथ किसी तरह की कोई प्रताड़ना नही हो सकता है । पर इन देशों में रह रहे - ‘अल्पसंख्यकों’ के साथ वर्षों से ज़्यादती और शोषण हो रहा है, हमें इनका दर्द नही देखा जा रहा है, अतः भारत में इनका स्वागत है । 

बिंदुवार अमित जी के तर्क का जवाब और ‘CAB बिल’ के पीछे की राजनीति :- (समझे इसे) 

पहला :- 
क्या भारत जैसे देश में ऐसा कोई क़ानून बन सकता है जिसमें किसी एक धर्म के लोगों को (मुसलमानों को) उस क़ानून में शामिल नही किया जाएगा और बाँकि धर्म के लोगों को किया जा सकता है । परंतु, इस बात को रहने देते है, ये क़ानून की बात है । सुप्रीम कोर्ट जाने । 

दूसरा :- 
यदि अमित जी और BJP का यह तर्क है कि - पड़ोसी मुल्क में “अल्पसंख्यकों” के साथ अत्याचार हो रहा है अतः उन्हें भारत बुला कर सुरक्षा देना चाहिए तो - बर्मा में मुसलमानो के साथ, चीन में मुसलमानो के साथ उससे भी भयंकर अत्याचार हो रहा है, क्या आप उन्हें नही बुलाएँगे । आपके ही तर्क के अनुसार उन्हें भी भारत बुला लेना चाहिए । अगर आप उन्हें नही बुला रहे हैं तो इसका सीधा मतलब है कि - आप दुनिया को चिल्ला-चिल्ला कर यह संदेश देना चाहते है कि - “भारत एक ऐसा देश है, जो दुनिया के किसी भी कोने में रह रहे “हिन्दूओं” की तकलीफ़ से तो परेशान हो जाता है पर मुसलमानो की तकलीफ़ से इस देश को कोई फ़र्क़ नही पड़ता है” । अगर फ़र्क़ पड़ता है तो - चीन और बर्मा से मुसलमानो को भी बुलाए नही तो चुप-चाप स्वीकार करें कि - मैं, अमित शाह हिन्दू की तलकीफ पर रोता हूँ, मुसलमान की तकलीफ़ से मुझे कोई फ़र्क़ नही पड़ता है” । 

तीसरा :-  
      यदि, सच में अमित जी को लगता है कि - पड़ोसी मुल्कों में “अल्पसंख्यक” के साथ शोषण हो रहा है तो - क्या अमित जी पड़ोसी मुल्क के प्रधानमंत्री के साथ बैठ कर, मोदी जी को साथ रख कर “चाय पर चर्चा” के माध्यम से इस मसले को सुलझा सकते हैं । क्या इतनी सूझ-बुझ नही है अमित जी और मोदी जी में । नही है तो स्वीकार करें । अगर फिर भी पड़ोसी मुल्क ऐसी हरकत करे तो आप इस मुद्दे को अंतराष्ट्रीय स्तर पर उठाएँ, आज वैश्विक स्तर पर कोर्ट है, क़ानून है, UN है । हर जगह इस मसले को रख कर इसे हल करें । 

चतुर्थ :-   
      आपके तर्क के अनुसार तो कल - दुनिया के जितने भी मुस्लिम देश है वहाँ रह रहे “अल्पसंख्यक” नागरिक को वहाँ की सरकार तंग करेगी तो आप उन्हें भारत बुला कर नागरिकता दे देंगे । आपको यह बतलाने की ज़रूरत नही है कि - दुनिया में कितने मुस्लिम देश है । 

  मेरा मत है कि - यदि ‘ज़िम्बाब्वे’ का कोई नागरिक चाहे वो हिन्दू हो या मुसलमान उसे यदि ज़िम्बाब्वे सरकार परेशान कर रही है तो - ये ज़िम्बाब्वे का आंतरिक मामला है, अगर मानवता के दृष्टिकोण से देखा जाए तो कोई दूसरा देश इस मामले को अंतराष्ट्रीय स्तर पर उठा कर उस देश में शांति स्थापित करने की गुहार लगा सकता है । इसका ये मतलब तो नही कि - उस देश के शोषित नागरिकों को अपने देश में बुला कर उसे नागरिकता बाँटा जाए । चाहे वो किसी धर्म का हो । (यह मेरा मत है)  

CAB के पीछे की असली वजह :- 

परंतु भारत सरकार ऐसा कर रही है, जाते-जाते इसके पीछे की असली वजह बता देता हूँ । 

कड़वा सच तो यह है कि - न तो अमित जी को “पड़ोसी अल्पसंख्यक” से कोई मतलब है और ना ही पड़ोसी मुल्क से । उन्हें मतलब है इस देश की राजनीति से, यहाँ की सत्ता से और BJP की हिंदुवादी छवि से जो राम-मंदिर से लेकर आज तक देश में यह छवि दिखलाने का प्रयास करती आ रही है कि - BJP ही एक मात्र पार्टी है जो हिन्दू के हित में कार्य करती है और वही मुसलमानो को इस देश से भगा सकती है । अब चुकी राम-मंदिर मुद्दा तो ख़त्म हो गया । ऐसी स्थिति में “राम मंदिर” मुद्दा के ख़त्म होते ही उससे भी भयानक और उससे भी ज़्यादा ख़तरनाक मुद्दा के साथ BJP आपके सामने खड़ी है ।

CAB की साज़िश को समझिए :- CAB के पीछे का मक़सद :- 

      यदि CAB क़ानून सफलतापूर्वक लागू हो जाएगा तो क्या होगा ?

v. NRC की सूची में नही आने वाले 20 लाख लोग जिनमे हिन्दू और मुसलमान दोनो है और कुछ जैन, पारसी, बौध भी । उन सब को विदेशी घोषित कर दिया गया है । पर CAB के क़ानून बन जाने से मुसलमान को छोड़ कर सभी को भारतीय नागरिक मान लिया जाएगा । तो विदेशी कौन बच जाएगा ???  


                    जी हाँ, आप बिलकुल सही सोंच रहें हैं - “मुसलमान”। केवल मुसलमान ही विदेशी बच जाएँगे । क्यूँकि CAB का क़ानून मुसलमान पर लागू नही होगा । 

बहुत ही ख़तरनाक साज़िश है यह ।

अंतिम पंक्ति पढ़ते जाएँ, भविष्य की सैर करते जाएँ  :- 

CAB के लागू हो जाने के बाद अब NRC पूरे देश में होगा । पूरे देश के जितने भी  ग़रीब, अनपढ़, रैन-बसेरा में रहने वाले, शोषित, वंचित और पीड़ित नागरिक है उनसे काग़ज़ माँगा जाएगा । स्वभाविक है कि - करोड़ों की संख्या में लोग काग़ज़ जमा नही कर सकेंगे क्यूँकि - उनके काग़ज़ बाढ़ में बह गए, आग में जल गए, उन्हें पता ही नही है कहाँ गए ? 
ऐसे तमाम लोगों को NRC की लिस्ट से दूर करके विदेशी घोषित कर दिया जाएगा । 

      पूरे भारत में बने इस लिस्ट में करोड़ों की संख्या में हिन्दू भी होंगे, करोड़ों की संख्या में मुस्लिम भी होंगे और कुछ अन्य धर्म के लोग भी होंगे । पर CAB के जादुई कमाल से मूलसमान को छोड़ कर सभी धर्म के लोगों को नागरिकता दे दिया जाएगा, और करोड़ों मुसलमान को “विदेशी नागरिक” कह कर उनका शोषण होगा क़ानून के आधार पर । 

      उस वक़्त “विदेशी नागरिक” घोषित किए गए मुसलमानो को  क़ानून के चाबुक से कोड़े पड़ेंगे और न तो इस देश का मुसलमान कुछ कर सकेगा और न ही कोई हिन्दू भाई-बहन उसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठा सकेगा क्यूँकि - सब कुछ तो क़ानून के हिसाब से हो रहा होगा । 

      इसलिए, आप सबसे हाथ जोड़ कर यह आग्रह कर रहा हूँ कि - आज ही वक़्त है, अभी ही वक़्त है । निकल जाए, अपने घरों से , आपको इस देश का संविधान आवाज़ दे रहा है, आपको इस देश की धर्म-निरपेक्षता पुकार रही है । आपको गांधी जी का जंत्र और सरदार पटेल की एकता चिल्ला-चिल्ला कर सड़क पर बुला रही है । ये वक़्त राजनीति करने का नही है । ये वक़्त है - देश को जोड़ने का । इस देश की आत्मा को मरने से रोकना होगा वरना आने वाली नस्लें हमसे सवाल करेगी और हम नज़र झुका कर खड़े रहँगे ।

कही ऐसा न हो कि:- 

जैसे,आज हम कहते है कि - 
  एक वक़्त था, जब भारत सोने की चिड़िया थी॰
कुछ साल बाद हम कहेंगे :- 
                                                    एक वक़्त था, जब भारत धर्म-निरपेक्ष था॰॰॰॰

                                                                                                                                     जय-हिंदी !!! 
Note :- टंकण संबंधी दोष के लिए क्षमा करें

धन्यवाद ।
Dr. Mohammad Ali 
Assistant Professor 
Dept. of Philosophy
RLSY College, Bakhtiyarpur.
Patliputra University, Patna

सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक और शैक्षणिक मुद्दों पर लिखे अन्य लेखों के लिए.  (Janghat.blogspot.com)
+91-7903892791, 9334302001


Comments

  1. धन्यवाद सर
    आपके वजह से हमें कुछ सीखने को मिला
    Thank you

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  2. Kafi umda likha hai Ali Bhai,

    Pura tathye saamne rakh diya hai aapne.

    Jazakallah khair

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