"देश CORONA से कैसे लड़े ?"




“ देश CORONA से कैसे लड़े ???”

हो सकता है, कुछ लोगों को मेरा अभी यह लिखना “अमानवीय” लगे .
मैं उन साथियों से माफ़ी माँग लूँगा मगर लिखूँगा ज़रूर.

हाँ, तो ये जो देश और दुनिया में हो रहा है, ये बिल्कुल सही हो रहा है . ये जो त्राहि-त्राहि मचा हुआ है . देश और राज्य अपनी सीमाएँ बंद कर रहे हैं . तथा-कथित बुद्धि-जीवी ख़ुद को अपने अपने घरों और कमरों में बंद कर रहे हैं और सरकार Social Distancing  की बात कर रही है . लोगों के मौत की तादाद घंटो के हिसाब से बढ़ती जा रही है इसमें  आश्चर्य-चकित होने की बात नही होनी चाहिए ? 

     मुझे तो यह समझ नही आ रहा है कि - वो लोग इतना दुखी क्यों हो रहे हैं जिन्हें मुज़फ़्फ़रपुर के “चमकी-बुख़ार” में मरे बच्चों के प्रति दुःख नही हुआ था ? वो लोग इतना डरे हुए क्यों है जो मुज़फ़्फ़रपुर के ‘बालिका-गृह-कांड’ में किशोरियों के यौन-शोषण पर अपने कामों में व्यस्त थे ? उत्तर प्रदेश में ऑक्सीजन की कमी से जब बच्चों की मौत हुई थी तो प्रदेश का बेशर्म स्वास्थ मंत्री कहता है - “अगस्त में बच्चे ऐसे ही मरते है” और इस मौत का सारा इल्ज़ाम उस डॉक्टर पर लगा दिया जो अपने पैसे से ऑक्सीजन ले कर आ रहा था. उस वक़्त इंसाफ़ और सत्य के लिए सड़क पर नही आए थे ना तो अब रहो घर के अंदर अच्छे से. ख़ूब बिस्तर गर्म कीजिए.    

     कड़वा सच तो यह है कि - आप CORONA से नही डर रहे है. आप प्रकृति की उस मौत से डर रहे हैं जो “अमीर और ग़रीब” में अंतर नही कर रहा है. आज अगर Corona से सिर्फ़ ग़रीब और मज़दूर मरने लगे तो आप ख़ूब मज़े से KFC में बैठ कर गोस्त खाएँगे क्यूँकि - ग़रीबों की तो पहुँच नही है वहाँ तक. कोई मीडिया, कोई सरकार और कोई जनता को कोई फ़र्क़ नही पड़ेगा कि - कितने ग़रीब किस देश में मर रहे है CORONA से. 

     चमकी बुख़ार से होने वाली मौत भी एक VIRUS ही था, मुज़फ़्फ़रपुर में किशोरियों का बार-बार बलात्कार किया जाना और इस तरह की तमाम घटना से किसी को कोई फ़र्क़ पड़ता है क्या ? कोई मीडिया इसे अपने Prime-Time में जगह देती है क्या ?सरकार इस मामले में संज्ञान लेती है क्या ? स्वास्थ सेवा को ठीक किया जाता है क्या ? प्रधान मंत्री “जनता-कर्फ़्यू” का सम्बोधन देते है क्या ? 

जवाब है - नही !!!    
जानते है क्यों -  क्यूँकि - ये ग़रीब के बच्चे होते है, मज़दूर के और किसान के बच्चे होते हैं जो ऑक्सीजन की कमी से, भूख की तड़प से, रेप से, बलात्कार से, शोषण से, अत्यचार से, गर्मी से, सर्दी से, रोज़गार की कमी से, फसल ख़राब हो जाने से हर रोज़ मरते है . मगर आपको और हमें कोई फ़र्क़ नही पड़ता है उल्टा हम कहते हैं कि - “अगस्त का महीना है, बच्चे तो मरेंगे”  . 

ऐसे बेशर्म लोग भूल जाते हैं कि - देश का पहले राष्ट्रपति “राजेंद्र-प्रसाद”, दूसरे प्रधान-मंत्री “ शास्त्री जी” कलाम साहब हो या लालू यादव या वर्तमान प्रधान-मंत्री “मोदी जी” सब ग़रीब के बच्चे ही थे . 

     अब दिक्कत यह हो रही है कि - Corona न अमीर देख रहा है और न ग़रीब देख रहा है तो आप सबका “कलेजा-मुँह में आ” गया है. क्या फ़िल्म-सितारे क्या राजनेता और क्या उद्योगपति सब के सब को मौत नज़र आ रही है. 24 घंटे टेलिविज़न पर CORONA का रोना मचा है. Alert इतना ज़बरदस्त कि - फ़ोन तक खांसी कर रहा है. सनेमा-हॉल, पार्क, पब, मॉल, स्कूल- कॉलेज, महा-विदयलाय सब के सब बंद कर दिए गए हैं . यहाँ तक कि - ट्रेन और बस जैसी अत्यंत ज़रूरी सेवाएँ भी बंद किया जा रहा है. अपने मौत का इतना डर ????? 

और जब ग़रीब भोजन के बिना मरते है, बच्चे ऑक्सीजन के बिना मरते है तब आप क्या कर रहे होते हैं पता है ? मैं बतलाता हूँ - आप यह योजना बना रहे होते है कि - कौन सी बस्ती जलाने से कितना वोट बटोरा जा सकता है ? अभी कौन सा ज़हर फैलाया जाए ताकि - हिंदू और मुसलमान के बीच दंगा फैल जाए . कभी लव-जेहाद का VIRUS, कभी शमशान और क़ब्रिस्तान का VIRUS, कभी मंदिर-मस्जिद का VIRUS, कभी गाय और सुअर के VIRUS को फैलाने में आप दिन रात लगे रहते है और इन VIRUS को हवा देते हैं हम और आप अपने अपने Mobile के ज़रिए. कभी WhatsApp तो कभी Facebook के ज्ञान से. क्यूँकि - ऐसे VIRUS से तो किसी करोड़पति, नेता या फ़िल्म-सितारे के बच्चे तो मरेंगे नही इसलिए दिन-रात चलता रहता है ऐसा VIRUS . हर न्यूज़ चैनल पर और हर मोबाइल पर और हर आम-ख़ास के बीच . 

आम-जनता लगी पड़ी है, “हाँ तो भैया, मंदिर यहीं बनेगा, कोर्ट चाहे कुछ भी बोल दे . दूसरी टीम वर्षों से लगी पड़ी है कि - मस्जिद की ज़मीन है छोड़ कैसे देंगे ? अल्लाह को क्या मुँह दिखलाएँगे? अरे, अक़्ल के अंधो, अब क्यू फटी हुई है . अब लो - ईंटा और पहुँच जाओ मंदिर निर्माण में. हो सकता है भगवान अपना मंदिर बनता देख कर CORONA को कम से कम भारत से दूर कर दें . 

     इतनी लड़ाई अगर हॉस्पिटल, यूनिवर्सिटी और रिसर्च- प्रयोगशाला बनाने के लिए कर लेते तो क्या पता आज हमारे देश का कोई वैज्ञानिक रिसर्च कर CORONA की दवाई का पता लगा लेता और पूरी दुनिया में भारत का डंका वैसे ही बजता जैसे आर्य-भट्ट और गौतम-बुद्ध और विवेकानंद जैसे लोगों ने बजवाया है.  
     मगर आपका ध्यान तो मॉब-लिंचिंग पर है. यहाँ तो रथ-यात्राएँ हो रही है. देश में रहना होगा तो “जय-श्री राम” कहना होगा . और दूसरी तरफ़ क्या हो रहा है -- “ 15 मिनट का वक़्त माँगा जा रहा है” . 
अरे दिया, 15 नही 45 मिनट का वक्त दिया . दूर करो इस CORONA को. नही तो ये Corona हिंदू- मुस्लिम का फ़र्क़ नही देखती .  

“देश के ग़द्दारों को गोली मारो सालों को” अब Corona को गोली कौन मारेगा ? Corona तो ग़द्दार और देश-भक्त में अंतर नही कर रहा है .  

 अगर पुरे दुनिया की बात करे तो - पच्चीस हज़ार (25000) लोग “भूखे रहें के कारण” हर रोज़ मर जाते हैं और लगभग 10 लाख लोग हर साल मरते हैं . भूख से मरने की हालत में - 119 देश की सूची में भारत का स्थान 103 नम्बर पर है. भारत में हर साल 7000 से अधिक लोग भूख से मर जाते हैं (यह आँकड़े बताते है). इसके अतरिक्त कितने मरते होंगे आप सोंच नही सकते हैं. बलात्कार, शोषण, ग़रीबी, हिंसा, हत्या, लूट, बेरोज़गारी और किसान आत्महत्या का आँकड़ा जोड़ दे तो आपकी गिनती ख़त्म हो जाएगी मगर मरने का आँकड़ा चलता रहेगा. अरे न जाने कितने बच्चे को तो गर्भ में मार दिया जाता है क्यूँकि उसका लिंग आपके पुरुषत्व से मेल नही खाता है . 

     मगर ये परेशनियाँ आपको परेशनियाँ नही देखती, आपको दिखता है - “शहीन-बाग” आपको दिखता है - दिल्ली का दंगा, मुज़फ़रनगर का दंगा और ना जाने कितने दंगे. आपका ध्यान इस बात पर है कि - पार्क में कौन किसको चुम्मा ले रहा/रही है? आपको इस बात से मतलब है कि - कौन किस जानवर का मांस खा रहा है और किसके फ़्रीज में कौन सा गोस्त रखा है ? माँ- बाप घबराएं हुए है कि - पता नही, मेरी बेटी अपनी इच्छा से शादी न कर ले, हम तो मुँह दिखाने लायक़ नही रहेंगे ? अरे, Corona आपको इस लायक़ भी नही छोड़ेगा, चिंता न करें. 

आज शाम जब आप थाली पीट रहे थे तब मैं यह लिख रहा था क्यूँकि - मैं परेशान हुँ, बेचैन हूँ..........      सिर्फ़ इस CORONA से नही हर उस VIRUS से जो इंसानियत को ख़त्म कर रहा है . ये तो प्रकृति का भेजा हुआ Corona है, आज न कल हम इसकी दावा ज़रूर बना लेंगे मगर उस VIRUS  की दवा कैसे बनाएँगे जिसे हम “मनुष्य” ने पैदा अपने ही नाश के लिए पैदा कर रखा है, जिससे एक वर्ग और समुदाय को हर रोज़ पीस-पीस कर मारा जा रहा है. 

बुराइयों और अच्छाइयों की जंग में हमेशा जीत अच्छाइयों की होती है क्यूँकि - अच्छाइयों के साथ इंसानियत होती है, प्रेम, करुणा और दया का भाव होता है. हम इंसान सदियों से अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ते आ रहें हैं और इस जंग में जीतते हुए आ रहे हैं. इस बार भी जीत हमारी ही होगी . 

इस विपत्ति के घड़ी में हमें रूक कर, ठहर कर सोचना होगा कि - हमें अपना वक़्त Corona से लड़ाई में ख़त्म करना चाहिए या आपसी प्रेम, भाई-चारा, अमन और सादगी से भरे जीवन बिताने में. हमें मंदिर-मस्जिद के लिए लड़ना चाहिए या स्कूल-कॉलेज की माँग करनी चाहिए . हमें सत्य के लिए सड़क पर एक-जुट हो कर आना चाहिए या अपने अपने घरों में क़ैद हो जाना चाहिए और मुँह पर ताला लगा लेना चाहिए ?हमें ज़रूरत से बढ़ कर 4 गाड़ियाँ रखनी चाहिए या ग़रीबों को खाना खिलाना चाहिए ? हमें बस्तियाँ जलाने में हिस्सा लेना चाहिए या बस्तियाँ बसाने के लिए आगे आना चाहिए .    

इस पंक्ति के साथ अपनी बात ख़त्म करूँगा की -


The World will not be destroyed by those who do Evil,
By those who watch them without doing anything.
       --- A. Einstein

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Note :- टंकण संबंधी दोष के लिए क्षमा करें

धन्यवाद ।
Mohammad Ali 
Assistant Professor 
Patliputra University, Patna. 

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