ईद और आज़ादी !!!

ईद और आज़ादी 

                      आप सभी को दिल की गहराइयों से ईद मुबारक ! इस ईद, आपके लिए दस्तर-ख़ान बिछाने, आपको मीठी सवईयाँ पेश करने और आपके गले- लगने वाली ख़ुशनसीबी तो नही मिल रही मगर ख़ुशियों के इस बेहतरीन पल को यादगार बनाने के लिए एक छोटा सा तोहफ़ा भेज रहा हूँ । 
इसे तोहफ़े की ख़ुशबू को अपने Share से दूर-दूर तक फैलाएँ !!! 



दोस्तों, आज आपका थोड़ा सा वक़्त लेकर, हम बात करेंगे........अपने प्यारे वतन (हिंदुस्तान/ भारत/ इण्डिया/) के बारे में. एक अलग नज़र और एक अलग नज़रिए से...........

साथियों, क्या आप सबको पता है, दुनिया में सबसे भयानक, पीड़ा से भरा और दर्दनाक, चीज़ क्या है ? – “ग़ुलामी” या “ग़ुलाम होना”. 

और 
सबसे नेक, पसंदीदा और दिल को सुकून देने वाली चीज़ क्या है - “#आज़ादी”. या “आज़ाद होना” . 

साथियों ये “दो शब्द” (ग़ुलामी और आज़ादी) ये ऐसे शब्द है, जिसे लिख कर या बोल कर नही समझाया जा सकता है . यह तो एक अवस्था है, एक Feeling है, एक अनुभव है, जिसे महसूस किया जा सकता है. यदि पुरे दुनिया के ज़मीन को काग़ज, पूरी दुनिया के पेड़ को क़लम और सात समुंदर के पानी को रोशनाई (Ink) बना दिया जाए तो भी हम इस 'एहसास' को व्यक्त नही किया जा सकता है . 

जिस तरह ‘उत्पत्ति’ प्रकृति का एक ऐसा स्वभाव है जिसे हम प्रकृति से अलग नही कर सकते हैं उसी तरह ‘आज़ाद’ रहना हर जीव का स्वभाव है. एक परिंदा सोने के पिंजड़े और मीठे पकवान को छोड़ कर उजाड़ घोंसले और कड़वी निम्बूडी के पीछे क्यों भागता है ? क्यूँकि आज़ादी उसका स्वभाव है . 

जब एक जानवर आज़ादी के लिए त्याग और क़ुर्बानी देने के लिए तत्पर रहता है तो हम तो फिर भी इंसान है. क्या आपने कभी सोंचा है कि - “माँ के गर्भ में बच्चा “पैर-मारना” क्यों शुरू कर देता है? इंसान जन्म लेने के पहले से ही “आज़ाद” होने का “संकेत देने लगता है. 

कुछ लोगों को लग सकता है कि - खाना, पीना, सोना और मल-मूत्र का त्याग करना ही आज़ादी है. पर इंसान की आज़ादी के मायने को आप जितना समझते जाएँगे उतना ही कम लगेगा . यह असीमित और अनंत है . दार्शनिक अंदाज़ में कहे तो - “इंसान का ब्रह्म से मिल जाने तक की स्वतंत्रता.”  

आज़ादी के महत्व को एक “ग़ुलाम” से बेहतर कौन बता सकता है ? 

साथियों, हमारे पूर्वजों ने भी 200 वर्षों तक अंग्रेजों की “ग़ुलामी” का दंश(पीड़ा) झेला है. न जाने कितनी क़ुर्बानीयाँ दी, कितना दर्द और संघर्ष का सामना करने के बाद सन 1947 में इस देश को एक “आज़ाद-मुल्क” बनाया. 

एक आज़ाद मुल्क और उसमें  सच्ची  आज़ादी का अनुभव करना उन सबके लिए एक ऐसे सपने जैसा था, जिसके लिए उन्होंने हंसते हुए मौत क़बूल कर लिया पर ग़ुलामी नही. ऐसा नही था कि - उन्हें खाने को खाना या पहनने को कपड़े नही थे, पर उन्होंने आज़ादी को चुना. कैसी आज़ादी ????????

ख़ुद को अभिवक्त करने की आज़ादी, दमन और शोषण के ख़िलाफ़ आवज़ उठाने की आज़ादी, आज़ादी, अपने विचार को रखने की, रोलेट एक्ट के ख़िलाफ़ बोलने की आज़ादी ? अंग्रेज़ी तानाशाही के ख़िलाफ़ विरोध करने की आज़ादी. बोल कर, नाच कर, चित्र बना कर, गाना गा कर, उत्सव मना कर अपनी बात रखने की आज़ादी, अपने हिसाब से कहीं भी आने-जाने की आज़ादी, कुछ भी खाने की आज़ादी, कुछ भी पहनने की आज़ादी, और अपने मेहनत के दम पर किसी भी पद को पाने की आज़ादी. 

साथियों, जिस आज़ादी के लिए उन वीरों ने अपने सीने पर गोली खा लिया क्या आप और हम उस आज़ादी को आज महसूस कर रहे हैं :- 

आप पूछते हैं ना - किस आज़ादी की बात करते हो तुम ? 

मैं, बात करता हूँ आज़ादी की : -- 
किसी से भी, कहीं भी प्रेम करने की.......
प्रेम-विवाह करने की....
विवाह नही करने की.....
महिलाओं के पढ़ने की....
अपने इच्छा से अपना जीवन साथी चुनने की....

मैं बात करता हूँ आज़ादी की : - 
कुछ भी खाने की......... 
अपने फ़्रीज़ में कुछ भी रखने की.......
कुछ भी खाते हुए ट्रेन- में आने जाने की आज़ादी.....
कुछ भी पहनने की आज़ादी........

मैं बात करता हूँ आज़ादी की : -
अन्याय और शोषण के ख़िलाफ़ आवज उठाने की.....
समय पर न्याय मिलने की आज़ादी....
भूखे को रोटी मिलने की आज़ादी......
भेद-भाव मुक्त रहने की आज़ादी..... 

मैं बात करता हूँ आज़ादी की : -
भाई-भतीजेवाद से आज़ादी.....
नस्ल-भेद से आज़ादी.....
लैंगिग भेद-भाव से आज़ादी...
जात-पात, छुआ-छूत से आज़ादी...
पितृसत्ता के ढोंग से आज़ादी...... 

आज़ाद होने से पहले ही देश के सामने सबसे बड़ी समस्या थी कि-  विविधता (Diversity) से भरे इस खूबसूरत मुल्क को ख़ूबसुरती से कैसे चलाया जाए जहाँ - प्रेम, अहिंसा, स्वतंत्रता (आज़ादी), बंधुत्वता (भाईचारे) और समता को आधार बना कर देश का विकास किया जा सके. 

      इस मुश्किल समस्या के समाधान के लिए - देश ने एक अचूक हथियार बनाया . इस हथियार का नाम है- #संविधान. आप माने या नही माने पर सच में यह एक हथियार है. एक ऐसा हथियार जिससे #अशिक्षा, #ग़रीबी, #भुखमरी, #बीमारी, #भेद-भाव जैसे हज़ारों दुश्मनो से लड़ा जा सकता है पर ज़रा ठहर कर सोंच कर ख़ुद ही जवाब दीजिए कि - ऐसा ‘हथियार’ यदि किसी ऐसे व्यक्ति को पकड़ा दिया जाए जिसे चलाने ही नही आता हो तो क्या नतीजा निकलेगा? वो व्यक्ति (समूह) उस हथियार से ख़ुद को ही घयाल कर लेगा । 

मज़ेदार बात यह है कि - हमारे संविधान में इस समस्या का भी समाधान है. और संभवतः यही समाधान देश की वर्तमान सभी समस्याओं का भी है . 

समाधान है - “चयन करने की आज़ादी” जी हाँ, “चुनने की आज़ादी”. 

इस समाधान से आप समझ सकतें है कि - “आज़ादी कितनी बड़ी दौलत है” . देश के सभी नागरिकों को अपने जन-प्रतिनिधि चुनने की आज़ादी है. हमें “संविधान का संचालन करने वाल व्यक्ति चुनने का अधिकार है और इस बात की पूरी आज़ादी है कि - ग़रीबी, भुखमरी, अशिक्षा जैसे दुश्मन से लड़ने के लिए हम मज़बूत “समझदार” आदमी को चुने या “ना-समझ” को. यह हमें तय करना है कि - हम, बुराइयों का अंत करने वाले "योद्धा" को चुने या देश और नागरिक का ही अंत करने वाले "बेवक़ूफ़" का चयन कर ले. 

अब यहाँ पर एक प्रशन उठता है कि - “आम जनता अच्छा चयन कैसे करे” ? 

इस सवाल का जवाब भी संविधान देता है . 

संविधान कहता है कि - आपको अच्छा नेता चुनने की चिंता नही करनी है. आप बस एक संवैधानिक इंसान बनने की चिंता करें, एक ऐसे इंसान जो सबसे पहले अपने स्वतंत्रता के लिए लड़ सकने की हिम्मत रखता हो और दूसरे के स्वतंत्रता का सम्मान करत हो. जब हम ऐसे समाज का निर्माण कर लेंगे जहाँ - ख़ुद को अभिव्यक्त करने की आज़ादी हो, जीवन-साथी से लेकर कपड़े और अपने सपने को चुनने की आज़ादी हो तब हमें अच्छा नेता चुनने की ज़रूरत नही पड़ेगी क्यूँकि - आज़ादी अपने आप में हर बंधन से मुक्ति और हर समस्या का समाधान है .  

 अपने  विचारों  को अभियक्ति  न करने का दुःख दुनिया का सबसे बड़ा दुःख है, क्यूँकि "आप" और कुछ  नही बल्कि "लाखों विचारो का प्रतिबिम्ब मात्र है'. और दुःख की अवस्था में क्या ईद और क्या दीपावली ? 

इसलिए, 
इस ईद अपने विचारों को अभिव्यक्त करें, अपनी आशाओं और अभिलाषाओं को उन्मुक्त करें, अपने सपनों के लिए जीना शुरू करें, अपनी स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करें, दूसरों की स्वतंत्रता का दिल से सम्मान करें और आज़ाद हो कर हर रोज़ ईद और हर रोज़ दीपावली मनाएँ  
                                                               


आपको यह लेख कैसा लगा । अपना Feedback ज़रूर दें । 

janghatfoundation@gmail.com           +91- 7903892791
ali2011pf@gmail.com                         +91- 9334302001

Note :- टंकण संबंधी दोष के लिए क्षमा करें

Dr. Mohammad Ali 
Assistant Professor 
Patliputra University, Patna. 

सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक और शैक्षणिक मुद्दों पर लिखे अन्य लेखों के लिए :-  
(Janghat.blogspot.com)

Comments

Popular Posts