Legislative council (विधान-परिषद) - आसान भाषा में उदाहरण के साथ समझें !

Legislative council
(विधान-परिषद) 


जिस तरह केंद्र में संसद ‘तीन-इकाइयों’ से मिल कर बनता है - 

"लोकसभा"           "राज्य सभा"              "राष्ट्रपति"

ठीक उसी तरह, 

राज्य में विधानमंडल  भी  तीन  इकाइयों को मिल कर बनता है -

"विधान-सभा"          "विधान-परिषद"         "राज्य-पाल"

राज्यस्तर के दो सदन :- 

विधान सभा   - Legislative Assembly   – (इसके सदस्य को MLA* कहते हैं) 
विधान-परिषद  - Legislative Council     - (इसके सदस्य को MLC* कहते हैं)

MLA*  :-  Member of Legislative Assembly  
MLC*  :- Member of Legislative  Council     

MLA का चुनाव- सीधे जनता वोट दे कर करती है. –   
 Example (बिहार में 243 MLA हैं)

 MLC का चुनाव- सीधे जनता वोट दे कर नही करती है – 
(M.L.C की संख्या उस राज्य के MLA की संख्या का 1/3 होता है)

आज इस लेख में हम “विधान-परिषद” की पूरी चर्चा करते हुए राज्य के विधानमंडल में इसकी उपयोगिता को आसानी से समझने का प्रयास करेंगे. 

Note: - 
लेख की शुरुआत से पहले यह बता देना ज़रूरी हैं कि - भारत के सभी राज्यों में विधान-सभा (Legislative Assembly) का होना ज़रूरी है, पर सभी राज्य में विधान-परिषद (Legislative Council) न तो है और न ही इसका होना ज़रूरी है. 


विधान-परिषद (Legislative Council)

आज आपके सामने, विधान-परिषद (Legislative Council) की चर्चा के क्रम में इससे जुड़े  विचार पर बात करेंगे न की सिर्फ़ किताबी ज्ञान. 

आइए, समझते है - विधान-परिषद (L.C) के पुरे खेल को. जैसा कि आप सभी जानते है कि - लोकतंत्र को ज़िंदा रखने और इसे मज़बूत बनाए रखने के लिए सबसे ज़रूरी चीज़ है - “सत्ता का संतुलन” (Balance of Power) बनाए रखना. सत्ता उग्र एवं तानाशाह न हो इसके लिए संविधान ने - हर जगह “शक्तियों का बँटवारा” कर रखा है. “शक्तियों के बँटवारे”  से लोकतंत्र में एक ‘संतुलन’ बना रहता है. 

जैसे - विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका की शक्तियों का बँटवारा करना.
जैसे - केंद्र एवं राज्य के बीच शक्तियों का बँटवारा करना ताकि एक संतुलन बना रहे.

इसी तरह लोकतंत्र में राजनीतिक शक्तियों (Political Power) के संतुलन को बनाए रखने के लिए भी - “Party based politics” के साथ - साथ “Party Less Politics”  के विचार का जन्म हुआ. 

Ø  “Party based politics” :- इसका सीधा और आसान मतलब है - वो रजनीति, जो सत्ता प्राप्त करके चलायी जाय. उदाहरण :- जैसे, कोई राजनैतिक दल चुनाव में ज़्यादा MLA जीत कर राज्य की सरकार चलाता है या ज़्यादा MP जीत कर केंद्र में सरकार चलाता है. 

केंद्र में  - भाजपा (NDA) ज़्यादा MP जीत कर केंद्र में देश की सरकार चला रही है.

बिहार में - (जेडीयू के नीतीश कुमार + भाजपा) चुनाव जीत कर सत्ता चला रही है.

जो पार्टी चुनाव में ज़्यादा MLA जीत लेती है, सरकार उसकी बनती है, अर्थात् विधान-सभा (Legislative Assembly) पर उसका क़ब्ज़ा होता है. CM उस पार्टी या उस गठबंधन का ही बनता है. सत्ता प्राप्त के बाद वह पार्टी जिस तरह से Politics करती है,  उसे ही - “Party based politics” कहते है.

महत्वपूर्ण बात :-    
ये अलग बात है कि, विधान-सभा (Legislative Assembly) में, कम MLA की वजह से जिस पार्टी की सरकार नही बन पाती है वो विपक्ष की पार्टी कहलाती है और उसके MLA विपक्ष के MLA कहलाते हैं. “विपक्ष के MLA” और “विपक्षदल के नेता”,  सरकार से सवाल पूछते हैं और उसके काम का हिसाब माँगतें हैं. जैसे अभी RJD के तेजस्वी यादव, सत्ता दल के “नीतीश कुमार” से सवाल पूछते रहते हैं.

सवाल :- लोकतंत्र के लिए “Party Less Politics” क्यों ज़रूरी है ?

Ø  “Party Less Politics”: - चुनाव में कभी-कभी विपक्ष बहुत कम MLA जुटा पाता है और ठीक ढंग से “विपक्ष” की भूमिका नही निभा पाता है. जैसे कि - केंद्र में पिछले 2014 से कोंग्रेस पार्टी को MP के रूप में इतने कम सीट प्राप्त हो रहे हैं कि - वो सदन में विपक्ष की भूमिका ठीक से निभा भी नही पा रहा है. अतः ऐसी परिस्थिति में सत्ता-दल को तानाशाही या मन-मानी करने से रोकने के लिए और सत्ता का संतुलन बनाए रखने के लिए -  “Party Less Politics” का विचार सामने आया.  

   “Party Less Politics” के विचार ने ही केंद्र-स्तर पर “राज्यसभा” () और राज्य स्तर पर विधान-परिषद () के अस्तित्व को जन्म दिया. ताकि विपक्ष कमज़ोर भी रहे और सत्ता पक्ष मनमानी नही कर सके. यही कारण है कि -- केंद्र-स्तर पर “राज्यसभा” और राज्य स्तर पर “विधान-परिषद” के सदस्यों का चुनाव जनता नही करती है. 

इससे पहले, आगे बढ़े - एक बहुत ज़रूरी बात समझ लें कि-  

 संविधान के Basic Structure (जिसमें छेड़-छाड़ सम्भव नही) में राज्य-सभा के अस्तित्व की बात कही गयी है पर राज्य के ‘विधान-परिषद’की चर्चा Basic Structure में नही है. यही कारण है कि - ज़रूरत के हिसाब से राज्य के “विधान-परिषद” का निर्माण कर दिया जाता है और ज़रूरत नही पड़ने पर इसे ख़त्म भी कर दिया जाता है. 

थोड़ा इतिहास समझ लें :-

                        आंध्रप्रदेश में “TDP”(Telugu Desam Party) की सरकार ने 1984 में राज्य के ‘विधान-परिषद’ को भंग करने का फ़ैसला लिया और देश की संसद से मंज़ूरी मिलने के बाद 31 May 1985 को इसे भंग कर दिया गया.

          पुनः 22 JAN 1990 को आंध्र-प्रदेश कोंग्रेस की सरकार ने 22 जनवरी 1990 को ‘विधान-परिषद’ के गठन के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दिया. वर्षों प्रतीक्षा के बाद 10 जनवरी 2007 को देश की संसद ने इसे मंज़ूरी दे दिया और 30 मार्च 2007 को एक बार फ़िर से आंध्र-प्रदेश ‘विधान-परिषद’ का गठन किया गया. 

     अभी आंध्र-प्रदेश में एक बार फ़िर से ‘विधान-परिषद’ को भंग करने की बात चल रही है. 


अभी वर्तमान में :- कुल 6 राज्य में विधान-परिषद है :- 

1.    आंध्र-प्रदेश
2.    बिहार
3.    कर्नाटक
4.    महराष्ट्र
5.    तेलंगाना
6.    उत्तर-प्रदेश

Note :- जम्मू-कश्मीर में विधान-परिषद था,परंतु केंद्र-शाहसित प्रदेश बनाने के बाद NOV 2019 में यहाँ की विधान-परिषद ख़त्म कर दिया गया है.


विधान-परिषद का निर्माण - कैसे ?

       यह तो जानते ही हैं कि, केंद्र-स्तर पर “राज्यसभा” और राज्य स्तर पर विधान-परिषद को Upper house (उच्य सदन) कहते है.  केंद्र स्तर पर लोकसभा और राज्य स्तर पर विधान सभा को Lower House (निम्न सदन)कहतें हैं.  आज विधान-परिषद State Upper house के निर्माण पर चर्चा करेंगे - 

Ø  संविधान के अनुछेद - 169, 171(1)(2) में विधान-परिषद के गठन की बात है. 

Ø  जब राज्य के विधान सभा के सदस्य (MLAs) को लगता है कि, राज्य में विधान-परिषद होना चाहिए तो विधान सभा इस बिल को एक तिहाई बहुमत से पास करके केंद्र को भजती है. केंद्र में - लोकसभा और राज्य-सभा में साधारण बहुमत द्वारा इसे पास कर दिया जाता है फिर राष्ट्रपति के मुहर के बाद उस राज्य में “विधान-परिषद” का निर्माण हो जाता है. ठीक इसी प्रक्रिया के माध्यम से उस राज्य के “विधान-परिषद” को समाप्त भी किया जा सकता है. 

विधान-परिषद का निर्माण - क्यों  ?
तर्क :-

    विधान-परिषद के निर्माण के लिए यह तर्क दिया जाता है कि- जब “विधान-सभा” के सदस्य (MLAs) जनता के लिए कोई विधेयक (क़ानून) बनाने का प्रयास करते हैं तो उस क़ानून से संबंधित सलाह- मशवरा देना और उसके मूल्याँकन की भी ज़िम्मेदारी विधान-परिषद के सदस्यों के पास होती है. 

एक महत्वपूर्ण बात :- 
     
Ø  विधान-परिषद के सदस्य किसी भी आर्थिक बिल (धन-विधेयक) को चाह कर भी न तो संशोधित (सुधार) कर सकते हैं और न ही उसे अस्वीकार कर सकतें हैं. विधान-सभा से पास होने जाने के बाद विधान-परिषद में 12 दिन में स्वतः पास हो जाता है. कोई भी अन्य विधेयक को विधान-परिषद के सदस्य 4 महीने तक रोक कर रख सकतें है पर इसके बाद वो स्वतः पास हो जाता है. 


मन की जिज्ञासा :- 

ये सुनने के बाद आपको ऐसा नही लग रहा है कि - यदि हर स्थिति में बिल पास ही होना है तो विधान-परिषद की ज़रूरत ही क्या है? क्या आपको ऐसा नही लग रहा है कि - विधान-परिषद तो हाथी के दिखलाने वाले दांत हैं ? 
(" राष्ट्रपति की तरह रबड़ स्टाम्प" )


विधान-परिषद के सदस्य कितने ?


Ø  संविधान यह कहता है कि - किसी राज्य में यदि विधान-परिषद का गठन करने है, तो उस विधान परिषद में कम से कम 40 सदस्य होने ही चाहिए.  

Ø  संविधान के अनुसार - किसी राज्य के विधान-परिषद के सदस्यों की संख्या किसी भी हाल में उस राज्य के विधान-सभा के सदस्यों (MLAs) की संख्या के एक-तिहाई से ज़्यादा नही हो सकता है. 

उदाहरण :- बिहार में अभी 243 MLA है तो इसका एक-तिहाई - अर्थात- 81 से ज़्यादा MLC नही हो सकता है. अभी वर्तमान में इसकी संख्या - 75 है. 

विधान-परिषद के सदस्य -  कौन  ?

 जैसा कि, ऊपर बता दिया गया है कि - विधान-परिषद के सदस्यों (MLCs) का चुनाव सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार (Universe Adult franchise) के द्वारा नही होता है, जबकि विधान-सभा (MLAs) के सदस्यों का चुनाव सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के द्वारा सीधे जनता करती है.  

विधान-परिषद के सदस्य कौन होते हैं और इन्हें कैसे चुना जाता है ? इसे बिहार के संदर्भ में समझतें हैं :- 

बिहार में MLC की सीट - 75.

इस 75 सीट को निम्न 5 भाग में वर्गीकृत (बाँटा) गया है :-

इस वर्गीकरण को आप अपने हाथ के पाँच-ऊँगली (Five Fingers) की तरह समझ सकते हैं :-

v पहला :-      (अंगूठा)                   – 75 का (1/6) =  13 सीट
v दूसरा :- (पहली बड़ी ऊँगली )        - 75 का (1/3) =   25 सीट
v तीसरा :- (दूसरी बड़ी ऊँगली )        - 75 का (1/3) =   25 सीट
v चौथा  :-   (छोटी ऊँगली )             - 75 का (1/12) =  06 सीट
v पाँचवा :- (सबसे छोटी ऊँगली )      - 75 का (1/12) =   06 सीट

          (गणितीय दिमाग़ लगा कर कभी-कभी इसमें एक-दो आगे पीछे भी कर दिया जाता है.)

v पहला :- (अंगूठा) – 75 का (1/6) =  13 सीट 

Ø  विधान-परिषद के ये 13 सीट सीधे-सीधे राज्य के “राज्य-पाल” द्वारा मनोनीत होते हैं. कला, विज्ञान, साहित्य, Ngo, इत्यादि क्षेत्र के लोगों को राज्यपाल सीधे नियुक्त कर सकतें हैं. 

[ काम की बात - “आपको अच्छे से पता होगा कि - “राज्य-पाल” उस राज्य के CM और कैबिनेट के सलाह पर ही किसी को मनोनीत करते हैं. अर्थात् यहाँ किसी न किसी रूप में CM की चलती है ]


v दूसरा (पहली बड़ी ऊँगली) :- 
कुल सीट का 1/3 (एक तिहाई) सीट. 75 का 1/3 = 25 सीट.
(इसका नाम :- शिक्षक MLA-निर्वाचन)

इस 25 सीट के लिए उम्मीदवार (खड़ा) कौन हो सकता है :- 

Ø इस 25 सीट के लिए कोई भी जनता उम्मीदवारी कर सकती है. (संविधानिक नियमो के अनुसार). 

इस 25 सीट के लिए वोट कौन देगा :- 
Ø इस 25 सीट के लिए उस राज्य के विधान सभा के सदस्य MLAs ही वोट दे सकतें हैं. अर्थात् बिहार के 243 MLA इस 25 सीट के लिए वोट करते हैं. जनता ने इन MLA को अपने निर्वाचन क्षेत्र से चुन कर विधान-सभा भेजा है. 

[ काम की बात - वास्तव में यह होता है कि - जिस पार्टी के MLA की संख्या विधान-सभा में ज़्यादा होती है वही पार्टी तय करती है कि - कौन उम्मीदवार होगा, क्यूँकि यदि कोई दूसरा खड़ा होगा तो - MLA उसे वोट ही नही देंगे और इस 25 सीट के लिए वोट देने का अधिकार सिर्फ़ और सिर्फ़ विधान-सभा के MLA को ही होता है. इसका मतलब, राज्य में जिसकी सरकार होगी, विधान सभा में जिस दल के MLA ज़्यादा होगा उसकी चलेगी. अर्थात् CM की चलेगी ]

v तीसरा : - (दूसरी बड़ी ऊँगली)
कुल सीट का 1/3 (एक तिहाई) सीट. 75 का 1/3 = 25 सीट.
(इसका नाम :- Local Bodies निर्वाचन-क्षेत्र )

इस 25 सीट लिए उम्मीदवार कौन हो सकता है ? 
Ø  इस 25 सीट के लिए कोई भी जनता उम्मीदवारी कर सकती है.(संविधानिक नियमो के अनुसार). 

इस 25 सीट के लिए वोट कौन देगा ? 
Ø  इस 25 सीट के लिए उस ग्राम-परिषद, ग्राम-पंचायत, नगर पालिकाओं, ज़िला बोर्ड, नगर निगम, और अन्य स्थानीय संस्थाओ के चुने हुए सदस्य और प्रतिनिधि ही वोट दे सकते हैं. 
[ ध्यान दें- आम जनता वोट नही दे सकती है. सिर्फ़ Local Bodies के निर्वाचित प्रतिनिधि ही वोट दे सकतें हैं. ] 

[ ध्यान दें :- इस 25 सीट के लिए पुरे राज्य को 25 निर्वाचन क्षेत्र में विभाजित कर दिया जाता है. जो व्यक्ति जिस निर्वाचन क्षेत्र से सम्बंधित होता है, वो उसी अपने क्षेत्र में खड़ा हो सकता है. मगर वोट सिर्फ़ निर्वाचित प्रतिनिधि ही दे सकतें हैं. एक और बात - निर्वाचित प्रतिनिधि ख़ुद MLC के लिए खड़े भी हो सकते हैं. ]


[ काम की बात - व्यवहारिक तौर पर इस 25 सीट के लिए निर्वाचित प्रतिनिधियों में से ही कोई खड़ा हो जाता है क्यूँकि वोट भी उन्ही लोगों को करना है. आम-जनता बिना वोटर बने, उम्मीदवार बनेगी तो कौन वोट देगा उन्हें. विधान परिषद के इस 25 सीट को अपने पाले में करने के लिए ही विभिन्न दल चाहती है - नगर-निगम एवं पंचायत स्तर पर ज़्यादा से ज़्यादा उनके लोग जीत हाँसिल करें तभी तो वो दल अपने अपने उम्मीदवार खड़ा करके उस 25 सीट पर क़ब्ज़ा जमा सकेगी.]


v चतुर्थ :- (पहली छोटी ऊँगली) (आख़री से पहले वाली) 

कुल सीट का 1/6 (एक का 12th) सीट. 75 का 1/12 = 6 सीट.
(इसका नाम :- शिक्षक निर्वाचन-क्षेत्र)

6 सीट होने के कारण पुरे बिहार को 6 शिक्षक निर्वाचन-क्षेत्र में बाँट दिया गया है.
   
इस 06 सीट लिए उम्मीदवार कौन हो सकता है ? 
Ø
     जो कम से कम तीन वर्ष तक Higher Secondary and High school में शिक्षक हो.  

इस 06 सीट लिए वोट कौन दे सकता है ?

Ø  इसके लिए भी जो कम से कम तीन वर्ष तक Higher Secondary and High school में शिक्षक हो. 


यहाँ उम्मीदवार और वोटर एक तरह के होते हैं, इसलिए इसे - शिक्षक निर्वाचन-क्षेत्र कहते हैं. शिक्षक उम्मीदवार और शिक्षक वोटर अपने अपने क्षेत्र में ही वोट डालते हैं. वोट डालने से पहले उन्हें अलग से निर्वाचन सूची में अपना नाम दर्ज करवाना पड़ता है. 

[ काम की बात - इस 06 सीट से उम्मीद किया जाता है कि - पढ़े, लिखे और बुद्धिजीवी लोग जीत कर विधान-परिषद के सदस्य बने.]

v पाँचवी :- (सबसे आख़री वाली छोटी ऊँगली )


कुल सीट का 1/12 (एक का 12th) सीट. 75 का 1/12 = 6 सीट.
(इसका नाम :- स्नातक निर्वाचन-क्षेत्र)

6 सीट होने के कारण पुरे बिहार को 6 स्नातक निर्वाचन-क्षेत्र में बाँट दिया गया है.

इस 06 सीट लिए उम्मीदवार कौन हो सकता है ?

Ø  जिन्होंने कम से कम तीन वर्ष पहले स्नातक की परीक्षा पास कर लिया हो. या इसको ऐसे कह सकते हैं कि - जिनके पास तीन वर्ष पुरानी स्नातक के level की डिग्री हो.    

इस 06 सीट लिए वोट कौन दे सकता है ?

Ø  जिन्होंने कम से कम तीन वर्ष पहले स्नातक की परीक्षा पास कर लिया हो. या इसको ऐसे कह सकते हैं कि - जिनके पास तीन वर्ष पुरानी स्नातक के level की डिग्री हो.

[ यहाँ उम्मीदवार और वोटर एक तरह के होते हैं, इसलिए इसे - स्नातक निर्वाचन-क्षेत्र कहते हैं. स्नातक उम्मीदवार और स्नातक वोटर को अपने-अपने निर्वाचन-क्षेत्र में ही वोट डालते हैं. वोट डालने से पहले उन्हें अलग से निर्वाचन सूची में अपना नाम दर्ज करवाना पड़ता है. ] 

[ काम की बात - इस 06 सीट से उम्मीद किया जाता है कि - पढ़े, लिखे और बुद्धिजीवी छात्र एवं छात्राएँ (लोग) जीत कर विधान-परिषद के सदस्य बने.]


विधान-परिषद के सदस्य का चुनाव - कैसे ?


विधान-परिषद के सदस्य को कैसे vote दिया जाता है ?

जैसा कि आपने ऊपर देखा, इसके सदस्यों (75 सदस्यों) को पाँच अलग भाग में वर्गीकृत किया गया है. सभी वर्ग के लिए अलग-अलग वोटर तय किए गए हैं.

पहला      :- 25 सीट - MLA वोट देते हैं. 
दूसरा       :- 25 सीट - Elected local bodies वोट देते हैं. 
तीसरा      :- 13 सीट - कोई वोट नही देता है. ‘राज्यपाल’ सीधे मनोनीत करते हैं.
चतुर्थ      :- 06 सीट - शिक्षक ही वोट दे सकते हैं. 
पाँचवा      :- 06 सीट - स्नातक पास कोई भी छात्र वोट दे सकता है. 

कुल :- 75 सीट

[ काम की बात :- इन सभी के अलग मतदाता सूची होता है. शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के लिए “शिक्षक-वोटर”  मतदाता-सूची में अपना नाम दर्ज करवा कर ही वोट दे सकते हैं.
स्नातक निर्वाचन-क्षेत्र के लिए “स्नातक-वोटर”  मतदाता-सूची में अपना नाम दर्ज करवा कर ही वोट दे सकते हैं. जिन्होंने अपना नाम मतदाता सूची में दर्ज नही करवाया है वो मत देने के योग्य नही है. ]


MLC चुनाव में वोट देने की प्रक्रिया क्या होती है ?

एकल संक्रमणीय मत-प्रक्रिया का प्रयोग (Single Transferable Vote System)

MLA और MP के साधारण चुनाव में हम और आप EVM पर जा कर किसी एक पसंदीदा उम्मीदवार के नाम के सामने वोट दे कर चले आते हैं और उन सभी उम्मीदवार में सबसे ज़्यादा वोट जिसे पड़ता है वो जीत जाता है और बांकी सब हार जाते है. जीतने वाले उम्मीदवार को अगर 28 % भी वोट आता है और वो सबसे अधिक है तो जीत उसकी होती है. इसे (First Past the Post System) भी कहते हैं.

     परंतु MLC के चुनाव में एकल संक्रमण मत-प्रक्रिया का प्रयोग होता है. इसमें जितने भी उम्मीदवार होते हैं उनका नाम एक पर्ची पर लिखा होता है और वोटर अपनी पसंद से उनके नाम के आगे क्रम संख्या लिख देते हैं. जैसे - जो उम्मीदवार सबसे ज़्यादा पसंद है उसके सामने - 01, जो उससे कम पसंद है उसके सामने - 02 फिर - 03, फिर - 04, फिर - 05 ............. इस तरह जितने उम्मीदवार है उसके आगे क्रम लिख दिया जाता है.  

Single Transferable Vote System में जीत कैसे होती है ?

उम्मीदवार को जीतने के लिए मतदान हुए वोट का - 50% से ज़्यादा वोट की ज़रूरत होती है. तभी उसे विजय माना जाएगा.

चुनाव प्रक्रिया हो जाने के बाद, गिनती करने की प्रक्रिया- (Counting) ?

एकल संक्रमण मत प्रक्रिया (Single Transferable Vote System) में वोटों की गिनती करना और किसी एक विजेता को जीत घोषित करना थोड़ा उलझा हुआ है. अतः मैं उदाहरण दे कर समझाने की कोशिश करत हूँ. 

उदाहरण :- 
     मान ले, MLC के एक पद(post) के चुनाव के लिए 4 उम्मीदवार हैं -

S.No
Candidate Name 
मतदाता अपना क्रम संख्या यहाँ लिखे 
1
Seema

2
Ali

3
John

4
Mohan


कुल 100 मतदाता ने इन चारों को अपनी पसंद के अनुसार  1-2-3-4 दे दिया. याद रखें, यहाँ किसी एक को वोट देने वाली स्थिति नही है. सभी 200 मतदाता इन चारों उम्मीदवार को वोट देंगे.  

Step by Step समझे :-

जब सभी 100 पर्चा खोला गया तो -  
Seema  को  40 लोगों ने 1st rank पर पसंद किया. 
 Ali     को  23 लोगों ने 1st rank पर पसंद किया.
 john   को  20 लोगों ने  1st rank पर पसंद किया.
           Mohan को  17 लोगों ने  1st rank पर पसंद किया.

पहला Step -  
 1st Rank के आधार पर लिस्ट बनाया जाएगा, अतः Seema सबसे ऊपर और Mohan सबसे नीचे होगा. अगर Seema को 50% से अधिक Vote आ जाता तो Seema को यही पर विजय घोषित कर दिया जाता पर यहाँ पर किसी को भी 50% से अधिक वोट नही आया है अतः यह प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. 

दूसर Step – 
     चूँकि, Mohan को सबसे कम लोगों ने 1st rank के लिए चुना. अतः - मोहन को इस गिनती की प्रक्रिया से बाहर कर दिया जाएगा. अब मोहन का मामला ख़त्म. 
मगर जिन पर्चों(Ballot) पर मोहन को 17 लोगों ने 1st Rank दिया था उन 17 पर्चों(Ballot) को सामने लाया जाएगा. अब ध्यान से देखा जाएगा कि - उन 17 लोगों ने Mohan को तो 1st Rank दिया था पर किसी न किसी को 2nd Rank, भी दिया होगा? 

तीसरा step :- (Mohan के पर्चों का 2nd Rank देखना)
अब देखा जाता है कि, उन 17 लोगों में 11 ने Seema को, 04 ने Ali को और 02 ने John को 2nd Rank दिया था. इस आधार पर- ये सारे वोट ऊपर के तीनो उम्मीदवार को मिल जाएँगे. 
Seema-    40 + 11 = 51
 Ali -     23 + 04  = 27
John -     20 + 02 = 22

So, Finally Seema scored more than 50% vote. She won the Election.


Note :- जब तक किसी को more than 50% vote नही आएगा, तब तक यह प्रक्रिया चलती रहेगी और नीचे के उम्मीदवार को ऐसे ही हटा कर उसके 2nd ऑप्शन को देखा जाएगा. मान लीजिए, मोहन के 17 पर्चों(Ballot) में ज़्यादा लोगों ने - Ali को 2nd Option दिया होता तो इस Round में अली का मत बढ़ सकता था.


आशा है, आपको यह एकल संक्रमण मत प्रक्रिया (Single Transferable Vote System) गिनती और जीत की प्रक्रिया समझ आयी होगी. अगर आप आसानी से समझ सकें तो कृपया इसे दूसरों तक Share करें ताकि वो भी इसे समझ सकें.

अंत में मेरा सुझाव :- 

     मुझे लगता है कि - विधान-परिषद के सदस्य वर्तमान में जिस तरह से कार्य कर रहें हैं वो बेहद ही निराशाजनक है. न तो इससे लोकतंत्र के उद्देश की पूर्ति हो रही है, न तो सत्ता का संतुलन बन रहा है और न ही इससे जनता का कोई फ़ायदा हो रहा है. 

     आप सब महसूस कर रहें हैं कि - आज MLC के सदस्य जनता के TAX के पैसे पर सत्ता का मलाई खा रहें है, और सत्ता पार्टी ही अपने ज़्यादा से ज़्यादा लोग को MLC बनवाने के लिए पूर राजनीतिक समीकरण फ़िट करते रहते हैं ताकि जितना अधिक से अधिक अवैध कमाई किया जा सके (लेख के काम की बात में आपने इसे समझा होगा)

जनता के Tax का इस कदर बर्बादी को लोकतांत्रिक समाज में बिलकुल भी स्वीकार नही किया जा सकता है और इसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाना चाहिए. अतः सुझाव के रूप में यह कह सकता हुँ कि - या तो इसे हर राज्य से बंद कर देना चाहिए या यदि इसे बंद नही करना है तो इसका उपयोग जनता के हित में होना चाहिए. इसके लिए एक IDEA है :- 

देश के हर राज्य में “विधान-परिषद” होना चाहिए परंतु इसके लिए विधान-परिषद के कार्य की रूप-रेखा बदलना होगा. उदाहरण देता हूँ :- 

ü  बिहार में 38 ज़िले हैं, अतः 76 MLC सीट का चुनाव होना चाहिए.
ü   हर ज़िले से 2 MLC. (कोई बहुत छोटा ज़िला है तो वहाँ से एक भी ले सकते है और किसी ज़िले में बहुत अधिक जनसंख्या है तो वहाँ से 3 भी ले सकते हैं )
ü  MLC का चुनाव MLA की तरह नही होना चाहिए बल्कि उसका चुनाव वही एकल संक्रमण मत प्रक्रिया (Single Transferable Vote System) के माध्यम से होना चाहिए.
ü  इनको चयन करने वाले पढ़े-लिखे लोग होने चाहिए. इस पद खड़े होने वाले लोग के लिए बिलकुल कड़े नियम होने चाहिए. (अपराधी नही होना चाहिए, समाजिक छवि बेहतर होना चाहिए, Etc......
ü  अतः एक ज़िले से 2 प्रतिनिधि होंगे जो उस ज़िले का प्रतिनिधित्व राज्य के विधान-परिषद से कर सकतें हैं.

ज़िला प्रतिनिधि के कार्य :-

पहला प्रतिनिधि का कार्य :- 
ü  ज़िला के अंतर्गत आने वाले सभी सरकारी अधिकारियों पर नज़र और इससे सम्बंधित जन-शिकायत सुनना.
ü  इनके सारे कार्य अपने ज़िला के "ज़िला-अधिकारी" के कार्य का मूल्यंकान करना और ज़िला-अधिकारी से नीचे आने वाले सभी सरकारी अधिकारी के कार्य का मूल्यंकान करना. ये अपना कार्य शांति से तथा बिना विवाद के करेंगे और अपनी रिपोर्ट तर्क और सबूत के साथ राज्य-पाल और राष्ट्रपति तक भेज सकते हैं.  


दूसरे प्रतिनिधि का कार्य :-

ü  ज़िला के अंतर्गत (पंचायती राज के सभी) चुने हुए सदस्य एवं MLA के कार्यों पर नज़र और इससे सम्बंधित जन-शिकायत सुनना.

ü  इनके सारे कार्य अपने ज़िला के अंतर्गत आने वाले जितने भी जनता के द्वारा चयनित उम्मीदवार हैं (MLA से लेकर मुखिया, सरपंच, ज़िला परिषद, वार्ड मेम्बर etc ) सभी के कार्य का मूल्यंकान करना और ज़िला-अधिकारी से नीचे आने वाले सभी सरकारी अधिकारी के कार्य का मूल्यंकान करना. ये अपना कार्य शांति से तथा बिना विवाद के करेंगे और अपनी रिपोर्ट तर्क और सबूत के साथ राज्य-पाल और राष्ट्रपति तक भेज सकते हैं.  
                          (इस संबंध में विस्तृत चर्चा फिर कभी होगी.......)


Note :- आपको मेरा यह सुझाव कैसा लगा . हमें ज़रूर बताएँ और कृपया अपना सुझाव भी दे, आपके सुझाव से और सुधार करने से ही हम एक बेहतर और लोकतांत्रिक स्थिति तक पहुँच सकते हैं. 
     आपका साथी 
Note :- टंकण संबंधी दोष के लिए क्षमा करें . 
धन्यवाद ।
Dr. Mohammad Ali                         
Assistant Professor                                
Dept. of Philosophy                           
RLSY College, Bakhtiyarpur.
Patliputra University, Patna
(Janghat.blogspot.com)
+91-7903892791, 9334302001


सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक और शैक्षणिक मुद्दों पर लिखे अन्य लेखों के लिए.


Comments

  1. बहुत सही जानकारी दी आपने विधान परिषद के बारे में। धन्यवाद

    ReplyDelete
  2. Bahut hi acchi jaankari. dhanyawad

    ReplyDelete
  3. बहुत ही आसान शब्दों में आपने जानकारी दी है... कई बिंदुओं पीकर कन्फ्यूज था लेकिन अब सारी कन्फ्यूजन दूर हो गई है... धन्यवाद

    ReplyDelete
  4. Ek Esa hi topic loksabha or rajsabha par likh dijiye

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular Posts