Bihar Election Result 2020 !!!
बिहार चुनावी नतीजे में क्या बदलाव हो सकता है ?
पहला :- चिराग़ फ़ैक्टर :-
बिहार के पासवान एवं अन्य दलित वोट जो “महागठबंधन” के खाते में जा सकते थे. परंतु चिराग़ पासवान के अकेले चुनाव लड़ने के कारण वो सभी वोट अब LJP के खाते में चले गए होंगे.
दूसरा :- भाजपा फ़ैक्टर
चूँकि, चिराग़ के अधिकतर उम्मीदवार BJP ने तय किया था, अतः उस विधानसभा के BJP वोटर (ख़ास-कर तथाकथित सवर्ण वोटर) जो अंदर ही अंदर नीतीश को CM के रूप में नही देखना चाहते थे, उनके vote “महा-गठबंधन” को नही पड़े बल्कि BJP के इशारे पर चिराग़ पासवान के उम्मीदवार को मिले होंगे.
तीसरा :- महा-दलित फ़ैक्टर :-
बिहार में लगभग 16 % दलित जाति है, जिसमें 4% पासवान जाति है. नीतीश कुमार ने “दलित” को तोड़ कर “महादलित” बनाया. महादलित में “पासवान” को छोड़ कर बाकी सभी जातियाँ शामिल है. नीतीश ने उन 12 % महा-दलितों को अनगिनत योजनाओं का लाभ दिया है. अतः, आज भी इन 12 % का झुकाव नीतीश की तरफ़ है.
चतुर्थ :- महिला फ़ैक्टर :-
नीतीश कुमार की सबसे बड़ी शक्ति “महिला-वोटर” (जीविका से लेकर आशा दीदी तक) वो आज भी बड़े पैमाने पर नीतीश के साथ हैं. महिला वोटर लगभग 50% है. (इसका एक चौथाई भी नीतीश के तरफ़ हो तो लगभग 12% वोट नीतीश का )
पाँचवा :- मुस्लिम फ़ैक्टर :-
नीतीश कुमार देश के एक-मात्र नेता हैं, जो पिछले 15 साल से BJP के साथ मिल कर सरकार चलाते हुए भी अपनी “धर्मनिरपेक्षता” वाली छवि को बनाए हुए हैं. आज भी यदि नीतीश खुल कर भाजपा का दामन छोड़ दें, तो बिहार के मुसलमानों का एक बड़ा वर्ग नीतीश की तरफ़ झुक जाएगा. मुसलमान में “अंसारी-जाति” का झुकाव वैसे भी नीतीश कुमार की तरफ़ रहता है. (परंतु, इस बार CAA और NRC की वजह से मुसलमान नीतीश से दूर हो सकते हैं)
छठा :- समाजवादी फ़ैक्टर :-
ज़ोर्ज फ़र्नांडिस जैसे नेता के साथ राजनीति करने वाले और लोहिया एवं जय-प्रकाश नारायण को अपना आदर्श मानने वाले “नीतीश-कुमार” भले ही BJP के साथ सरकार में हों पर उनके अंदर आज भी समाजवादी DNA मौजूद है. अतः समाजवादी सोंच वाले कुछ वोटर आज भी नीतीश के पक्ष में हो सकतें हैं.
सातवाँ :- विकास फ़ैक्टर.
बिहार के विकास की रफ़्तार भले ही आप धीमी कह दें पर बिहार के विकास को आप झुठला नही सकते हैं. चाहे बिजली हो, सड़क हो या अपराध-नियंत्रण एवं सुरक्षा की बात हो. अतः जिन्होंने लालू के 15 साल और नीतीश के 15 साल दोनो को अपने आँखो से देखा है. हो सकता है उनका वोट आज भी नीतीश के पक्ष में गया होगा.
आठवाँ :- शराब फ़ैक्टर :-
बिहार में नीतीश के द्वारा किया गया “शराब-बंदी” का फ़ैसला “राजनीतिक” है या सामाजिक ये एक विमर्श का विषय है, परंतु नीतीश कुमार ने दबे-कुचले और ख़ास कर महिला वर्ग में इस फ़ैसले का समाजीकरण कर दिया है और उन्हें शोषण एवं घरेलु हिंसा से ज़रूर दूर किया है.ज़रूर हो सकता है. शराब से होने वाले राजस्व घाटे और शराब की कालाबाज़ारी को भी झुठलाया नही जा सकता है परंतु सड़क-दुर्घटना एवं खुले-आम दरुबाजी जैसी चीजें ज़रूर कम हुई है.
मेरा Observation :- “पहले आम जनता, “नशेबाज़” के सामने नही जाते थे, अब नशेबाज आम लोगों के सामने नही जाता है”. इसे ही कहते हैं - “180 डीग्री बदलाव”.
नौवाँ :- जोड़-तोड़ फ़ैक्टर :-
अगर NDA गठबंधन में BJP को कम सीट आता है और महा-गठबंधन में कोंग्रेस को सम्मानजनक सीट आ जाता है तो नीतीश कुमार हमेशा से “कोंग्रेस” की तरफ़ जाने का रास्ता खोल कर चलते हैं. ये उन्हें काम आ सकता है.
दसवाँ फ़ैक्टर :- सीटों का बँटवारा :-
यदि आप सूक्ष्मता से नीतीश के 115 सीटों के बँटवारे और उंनके उम्मीदवार को जातीय- समीकरण के चश्मे से देखेंगे तो आपको इसमें नीतीश कुमार का Social Engineering साफ़-साफ़ दिख जाएगा.
तर्क :- नीतीश कुमार ने JDU की 115 सीटों को जातिवार किस तरह बाँटा है.
Ø करीब 20 फीसदी अगड़ी जातियां हैं, जिसमें राजपूत सबसे ज्यादा हैं. नीतीश कुमार ने अगड़ी जातियों को कुल :- 20 सीट दिए. जिसमें राजपूत को 07 सीट और भूमिहर को 10 सीट दिए हैं. वैश्य को 3 और ब्राह्मण को 2
बिहार में करीब 15 फ़ीसदी यादव हैं. नीतीश कुमार ने इसे 18 सीट दिए.
Ø बिहार में 16 फ़ीसदी मुसलमान हैं. नीतीश कुमार ने इसे 11 सीट दिए.
Ø बिहार में कुर्मी 4 फ़ीसदी और कोइरी जाति के 8 फ़ीसदी हैं. नीतीश कुमार ने इसे 12 सीट दिए हैं.
Ø नीतीश ने अति पिछड़ा वर्ग को - 19 सीट दिए हैं.
Ø कुशवाहा समाज को 15 सीट.
Ø धानुक को 8 सीट .
Ø ST को एक सीट.
नोट :- ये सभी जातिगत आँकड़े अनुमान के आधार पर है क्यूँकि देश ने अब तक जाति के आँकड़े सार्वजनिक रूप से जारी नही किए हैं.
विशेष 1: - "नीतीश कुमार के इतने सारे फ़ैक्टर को यदि "तेजस्वी यादव" अपने "युवा-छवि" से मात देने में कामयाब हो जाति है तो बिहार में बदलाव निश्चित हैं.
विशेष 2 :- इस बार नीतीश कुमार का सबसे कमजोर पक्ष यह है कि - NDA के उनके साथी "भाजपा" ही नीतीश की नाँव डुबाना चाहती है और इसका सीधा फ़ायदा "तेजस्वी यादव" को मिल सकता है.
धन्यवाद .
ये लेखक के अपने विचार है :-
Dr. Mohammad Ali
Assistant Professor
Dept. of Philosophy
RLSY College, Bakhtiyarpur.
Patliputra University, Patna
सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक और शैक्षणिक मुद्दों पर लिखे अन्य लेखों के लिए-
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