बिहार की राजनीति में नीतीश कितने ज़रूरी ?

 


बिहार की राजनीति में "नीतीश" कितने ज़रूरी ???


आख़री चरण के मतदान और फिर नतीजे आने से पहले इस लेख को पढ़े, जहाँ जीत और हार का फ़ैसला भले ही न हो पर आप बिहार की आने वाली 10 साल की राजनीति को समझ सकेंगे :-  

लेख से पहले - (लेखक का पंचलाइन) - 

 

लालू जी की अनुपस्थिति में हो रहे इस बिहार चुनाव का कोई नायक नही है. इस बार, जनता किसी एक दल या पार्टी को सत्ता तक पहुँचाने के बजाए दूसरे दल को सत्ता से दूर करने के लिए मतदान कर रही है. 

 

तर्क :- 

यदि "तेजस्वी-यादव", CM बनते हैं, इसका मतलब जनता ने 'तेजस्वी' को जिताया नही है बल्कि वो 'नीतीश' के 15 साल से त्रस्त हो चुकी है.

और 

यदि "नीतीश" फिर से CM बनते है इसका अर्थ जनता ने नीतीश को जिताया नही बल्कि तेजस्वी के नेतृत्वता को पूरी तरीक़े से अस्वीकार कर दिया. 

 

 

अब, लेख की शुरुआत :- 


इसकी शुरुआत, लेख के दो नायक 'नीतीश’ और 'तेजस्वी’ से नही करते हुए सहयोगी कलाकार "चिराग़ पासवान” से कर रहा हूँ, जो इस चुनावी-सीन में भले ही बैक-ग्राउंड म्यूज़िक की तरह हो पर इसके बिना “JDU Vs BJP” का  कोल्ड-वार हो, ‘RJD vs BJP’ का एक्शन-सीन हो, ‘BJP और LJP की मोहब्बत हो या LJP और JDU का "तलाक़" हो ........... सब के सब नीरस और उदासीन लगते हैं. 

 

अतः, चिराग़ के धुन पर आगे बढ़ने वाले इस लेख को पढ़ने और समझने के लिए हो जाएँ तैयार :- 


पहला  चेप्टर:- चिराग़ चेप्टर: -


 "चिराग़ के हाथों नीतीश की रौशनी कैसे बुझा रही है भाजपा"  

 

         राम-विलास पासवान की राजनीति को आगे ले जाने वाले 'चिराग़-पासवान' को वो काम करना है जो उनके स्वर्गीय पिता नही कर सके :- "बिहार की राजनीति में अपनी पार्टी (LJP) को स्थापित करना".  सांसद के रूप में केंद्र से अपनी राजनीति की शुरुआत करने वाले 'चिराग़-पासवान' ने इस चुनौतिपूर्ण कार्य को पूरा करने के लिए BJP से इश्क़ कर लिया.  



      वो कहते हैं ना, राजनीति में एक-तरफ़ा इश्क़ नही होता है. अतः BJP बिहार से नीतीश की पार्टी का सर्वनाश करने के लिए चिराग़ के इश्क़ को तीन बार “क़बूल-है” कह चुकी है.

 

तर्क :-  

भाजपा पिछले एक साल से नीतीश कुमार पर चिराग़ से राजनीतिक हमला करवा कर नीतीश के सीटों को कम करवाना चाहती थी और चिराग़ जैसे अन्य छोटे दलों को ज़्यादा सीट देना चाहती थी. कम सीट से लड़ने पर नीतीश कमज़रो पड़ जाते और भाजपा नीतीश के साथ रहते हुए उसे CM की कुर्सी से दूर कर देती. मगर नीतीश कुमार हिमालय की मज़बूती दिखलाते हुए बिहार चुनाव में “122” सीट से लड़ने का एलान कर दिया.


       "श्याम रजक" (दलित चेहरा) के JDU से चले जाने के कारण नीतीश ने अपने खाते के 07 सीट दूसरे दलित नेता (जीतन-राम-माँझी) की पार्टी “HUM” को दे कर अपने साथ कर लिया. अब नीतीश 115 सीट से लड़ रहे हैं. 

 

      नीतीश के ज़िद के आगे, भाजपा को प्लान A फ़ेल हो गया. ऐसे में भाजपा ने चिराग़ के साथ मिल कर प्लान B  का  प्रयोग कर दिया. 

 

भाजपा का प्लान B :-

 

क्या है प्लान B :- इसके अनुसार BJP, चिराग़, और नीतीश ‘दिल्ली’ में तो साथ हैं पर पटना में चिराग़ ने नीतीश कुमार के ख़िलाफ़ अपनी पार्टी का उम्मीदवार खड़ा कर दिया. इस PLAN B के ज़रिए BJP ने चिराग़ के साथ मिल कर “नीतीश” और “तेजस्वी” दोनो पर हमला कर दिया. कैसे ?

 

इसे DATA के साथ समझतें हैं :- 

      

"JDU" (नीतीश) और राजद (तेजस्वी) 77 सीटों पर आमने सामने लड़ रही है, और BJP के कहने पर चिराग़ ने 90% से अधिक उम्मीदवार वहाँ से खड़ा किया जहाँ से "JDU" लड़ रही है. अतः चिराग़ के उम्मीदवार जो भी (पासवान+अन्य दलित) वोट काटेंगे, वो या तो JDU के पास जाने वाले थे या RJD को पास. अतः BJP ने दोनो का नुक़सान कर दिया. 

 

गहरी बात :- चिराग़ के 80% उम्मीदवार की लिस्ट भाजपा ने तैयार और तय किया है. क्यूँकि चिराग़ की पार्टी विधान-सभा में इतने उम्मीदवार की न कोई योजना थी और न ही इतना संसाधन. अतः BJP, चिराग़ को संसाधन भी दे रही है और अपने हिसाब से अपने कई लोगों को उम्मीदवार भी बनाया है. और अंदर-ही अंदर अपने वोटर को JDU के ख़िलाफ़ वोट देने भी कहा है. 

 

Ø तेजस्वी को नुक़सान :- जो मज़दूर, दलित, ग़रीब CORONA एवं Anti- Incumbency के कारण नीतीश (NDA) से ग़ुस्सा थे वे सबके-सब तेजस्वी को वोट देते पर अब उनके पास "चिराग़" नामक विकल्प है.  

Ø  नीतीश को नुक़सान :- जो भाजपा के वोटर, नीतीश को वोट देने वाले थे, उन्हें भाजपा ने चिराग़ को वोट देने का इशारा कर दिया है. क्यूँकि, बहुत सारे उम्मीदवार तो BJP ने ही तय किए हैं.  

 

पहले चेप्टर का निष्कर्ष :-

इस तरह, BJP अपने PLAN B से बिहार में नीतीश को भी कमज़ोर कर रहे हैं और जो 15 साल में नीतीश से ग़ुस्सा हुए वोटर है उन्हें तेजस्वी के पास जाने से भी रोक रहें हैं.  



आपका प्रशन :- भाजपा के प्लान B का साथ चिराग़ क्यूँ दे रहें हैं ? उसे क्या फ़ायदा ?

 

मेरा उत्तर :- चिराग़ की जगह ख़ुद को रख कर देखिए. चिराग़ का दो मक़सद है :- 

 

पहला:-अपनी पार्टी को पुरे बिहार में फैलाना (जो पिता नही कर सके). 

दूसरा:- पार्टी का वोट-बैंक दलित(पासवान) से बढ़ाना (जो पिता नही कर सके).

 

BJP के प्लान से चिराग़ के दोनो मक़सद पुरे हो रहें हैं. उनकी पार्टी बिहार के लगभग 150 सीट से लड़ रही है और वो भी दूसरे के पैसे और संसाधन से. उनकी पार्टी में दलित के अतरिक्त अन्य जाति के उम्मीदवार लड़ रहे हैं. भाजपा के मदद से उनका वोट % बढ़ रहा है, उनका युवा चेहरा चमक रहा है और केंद्र से लेकर राज्य तक भाजपा से इश्क़ तो बना ही हुआ है. अब आपको क्या चाहिए. इसे ही कहते हैं राजनीति. 

 

BJP का असली गेम-प्लान समझते जाएँ  :- 

 

पहले चेप्टर ख़त्म करने से पहले यह समझते जाए कि - यदि BJP अपने Plan/मक़सद में कामयाब हो गयी और बिहार की राजनीति से नीतीश और उनके पार्टी(JDU) को सच में किनारे कर दिया तो बिहार में दो ही बड़े दल बच जाएँगे :- 

 

एक  तरफ़ RJD + Cong (महा-गठबंधन)

 

दूसरी तरफ़ सिर्फ़ और सिर्फ़ BJP (भारतीय जनता दल)

 

     तब अमित शाह जैसे राजनीतिक कारोबारी चिराग़, कुशवाहा, माँझी, सहनी जैसे नेताओं को धन-बल और जुगाड़ से ख़रीद कर बिहार में BJP की स्वतंत्र सरकार बना लेंगे. फिर BJP तय करेगा कि - बिहार का मुख्यमंत्री “RSS का आदमी” होगा या कोई “तथा-कथित स्वर्ण-जाति” का नेता या यादव जाति का वोट लेने के लिए कोई “भाजपाई यादव नेता”. 

 

      आप इस बात को गहराई से समझ लें कि - BJP पार्टी को अभी राजद (तेजस्वी) से कोई दिक्कत नही है. BJP को असली दिक्कत नीतीश कुमार से है. नीतीश कुमार को किनारे कर के भाजपा इस बार (2020) विपक्ष में आएगी और अगली बार (2025) सत्ता में आयगी. 

 

      फिर बिहार पर BJP का एक-क्षत्र राज होगा एवं धर्म-और सांप्रदायिकता का नाच होगा, जिसे  पिछले 15 साल से नीतीश कुमार ने एक-हद तक रोक के रखा हुआ था. 


तर्क :- 


पहला तर्क :- पिछले 15 साल से BJP सत्ता से जुड़ी हुई थी फिर भी BJP के एक नेता को नीतीश कुमार ने उभरने नही दिया. 


दूसर तर्क :- पिछले 15 साल से BJP का बिहार की सत्ता से जुड़ाव था फिर भी जनता     कहती थी - "यह नीतीश राज है, BJP राज नही" 


तीसरा तर्क :- नीतीश कुमार ने हमेशा BJP को अपने पीछे रख कर उसे अपने इशारों पर चलाया, जब चाहा छोड़ दिया, जब चाहा जोड़ लिए.      



लेखक के  विचार :-


मैं, लोकतंत्र में सत्ता-परिवर्तन का समर्थन करत हूँ और बिहार में भी बदलाव चाहता हूँ. परंतु, उसी लोकतंत्र में संतुलन को बनाए रखने के लिए बिहार में - “नीतीश-कुमार और उनकी पार्टी” का ज़िंदा रहना ज़रूरी है. अतः तीसरे चरण में वोटर को इस बात का ख़्याल रखना चाहिए.

 

चुनाव के नतीजे आने से पहले तीनो चरण के आँकड़ो के साथ आपके पास फिर से हाज़िर हो सकता हूँ........तब तक के लिए अलविदा. 



नोट :- लेख अच्छा लगे लो.......अपनी राय ज़रूर दे. यदि आप मेरे विचार से असहमत है तो आपके राय का स्वागत है और मेरी त्रुटियों एवं कमियों को बतलाने के लिए आपका हमेशा शुक्र-गुज़ार रहता हूँ..........


ये लेखक के अपने विचार है :-

Dr. Mohammad Ali 

Assistant Professor 

Dept. of Philosophy

RLSY College, Bakhtiyarpur.

Patliputra University, Patna.


 

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