आज़ादी के अमृतमहोत्सव पर मेरा यह लेख पढ़ें - "मोहम्मद अली"
भारत की स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे होने पर आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहे सभी साथियों के बीच अपनी बात की शुरूआत "महात्मा-गांधी" को अपना गुरू और आदर्श मानने वाले "मार्टिन लूथर किंग" से करते हैं । मार्टिन लूथर किंग ने मनुष्य के "स्वतंत्र हो कर जिंदगी जीने" और "जीते जी मर जाने" दोनो ही पहलुओं पर बड़ी ही खूबसूरती और हिम्मत वाला बयान दिया है ।
छात्र जीवन में ही गांधी जी के विचारों से प्रभावित होने वाले मार्टिन लूथर किंग ने कहा था - "इन्सान जब तक व्यक्तिगत(Personal)चिंताओं से ऊपर उठ कर पूरी मानवता के बारे में नही सोंचता तब तक उसने जिन्दगी जीना शुरू ही नही किया"
साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि - “जिस दिन हम उन मुद्दों को लेकर चुप हो जाते हैं जो समाज के लिए मायने रखते हैं, उसी दिन से हमारे जीवन का अंत होने लगाता है”.
मेरी समझ से , एक इन्सान के जीवन के सामाजिक पहलु को इतनी खूबसूरती से शायद ही किसी ने परिभाषित किया होगा. मार्टिन लूथर किंग की जीवन शैली और उनके विचारों से समाज के प्रति एक इन्सान की जिम्मेदारियों का एहसास होता है .
आज हमारा देश हर्ष और उल्लास के साथ आज़ादी का अमृत-महोत्सव माना रहा है। स्वतंत्रता के इस जश्न को "जाति, धर्म, रंग, लिंग, और क्षेत्रीयता की भावना से ऊपर उठ कर एक-जुट हो कर मनाया जा रहा है।
"15 Aug 1947" का हम भारतवासी अंग्रेज़ों के गुलामी की जंजीर को तोड़ कर आज़ाद हो गए थे. इस दिन को आजादी के दिन के रुप में मनाया जाता है, मगर यह दिन सिर्फ़ अंग्रेजी हुकूमत से भारत के आज़ाद होने का दिन नही था, यह वो महत्वपूर्ण दिन था, जिस दिन गांधी के सपनों की जीत हुई थी. सुभाष-चंद्र बोस के संघर्ष को सम्मान मिला था, भगत सिंह, सुखदेव, और राजगुरु के शहादत को अमरता मिली थी, और न जानें देश के कितने वीर सपूत के बलिदानों को एक संजीवनी मिली थी.
15 Aug का दिन सिर्फ़ आजादी का दिन नही है , यह संघर्षों और बलिदानों को सफ़लता में बदलने का दिन है. हमारे पूर्वजों ने इस आज़ादी को हासिल करने के लिए न जाने कितनी कुर्बानियां और कितना जद्दोजेहद किया होगा इसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते हैं ।
ख़ुद को अभिवक्त करने की आज़ादी, दमन और शोषण के ख़िलाफ़ आवज़ उठाने की आज़ादी, अपने विचार को रखने की आज़ादी, रोलेट एक्ट के ख़िलाफ़ बोलने की आज़ादी, अंग्रेज़ी तानाशाही के ख़िलाफ़ विरोध करने की आज़ादी. बोल कर, नाच कर, चित्र बना कर, गाना गा कर, उत्सव मना कर अपनी बात रखने की आज़ादी, अपने हिसाब से कहीं भी आने-जाने की आज़ादी, कुछ भी खाने की आज़ादी, कुछ भी पहनने की आज़ादी, और अपने मेहनत के दम पर किसी भी पद को पाने की आज़ादी.
लगभग 200 साल चले आज़ादी के लिए इस संघर्ष से हमे यह बात समझ आती है कि - "आज़ादी खैरात या भीख में मिल जाने वाली चीज़ नही है, इसके लिए निरंतर संघर्ष करना पड़ता है और "स्वतन्त्रता के लिए कुर्बानियां भी देनी पड़ती है".
हमारे पूर्वजों ने बलिदान और संघर्ष की मिसाल केवल देश की आजादी के लिए नही बल्कि देशवासियों के आजादी के लिए दिए थे. साथियों, जिस आज़ादी के लिए स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने सीने पर गोली खा लिया क्या आप और हम उस आज़ादी को आज महसूस कर रहे हैं.
आपके मन में विचार आया होगा कि - जब हमारा देश अंग्रेजी हुकूमत से आज़ाद हो गया है तो देशवासियों को इस आज़ाद भारत में कैसी आज़ादी चाहिए ??
आप पूछते हैं ना - किस आज़ादी की बात करते हो ?
मैं, बात करता हूँ आज़ादी की : --
किसी से भी, कहीं भी प्रेम करने की.......
प्रेम-विवाह करने की....
विवाह नही करने की.....
महिलाओं के पढ़ने की....
अपने इच्छा से अपना जीवन साथी चुनने की....
मैं बात करता हूँ आज़ादी की : -
कुछ भी खाने की.........
अपने फ़्रीज़ में कुछ भी रखने की.......
कुछ भी खाते हुए ट्रेन- में आने जाने की आज़ादी.....
कुछ भी पहनने की आज़ादी........
मैं बात करता हूँ आज़ादी की : -
अन्याय और शोषण के ख़िलाफ़ आवज उठाने की.....
समय पर न्याय मिलने की आज़ादी....
भूखे को रोटी मिलने की आज़ादी......
भेद-भाव मुक्त रहने की आज़ादी.....
मैं बात करता हूँ आज़ादी की : -
भाई-भतीजेवाद से आज़ादी.....
नस्ल-भेद से आज़ादी.....
लैंगिग भेद-भाव से आज़ादी...
जात-पात, छुआ-छूत से आज़ादी...
पितृसत्ता के ढोंग से आज़ादी......
बात देश की स्वतंत्रता की हो या मनुष्य के स्वतन्त्रता की. आज़ादी एक ऐसी स्थिति है, एक सुखद अनुभव है, जिसको हासिल तो हर कोई करना चाहता/चाहती है पर इसके लिए संघर्ष करने और बलिदान देने के लिए कौन कौन तैयार है ? इसके लिए जो सब्र चाहिए, इसके लिए जो गांधी का सत्याग्रह चाहिए, और भगत सिंह का बलिदान चाहिए?
स्वतंत्रता हासिल करना और आजादी के साथ अपना जीवन जीने का हक केवल किसी एक देश या राज्य में रह रहे लोगों को नही, बल्कि इस विश्व के तमाम मानव-जाति को है.
इसलिए, आज आजादी के दिन, हमें वैश्विक आज़ादी की संकल्पना करनी चाहिए और आत्म सम्मान के साथ जीने और सभी के बुनियादी हक को पूरा करते हुए समान अवसर की आज़ादी का लक्ष्य रखना होगा.
अपनी बात को समाप्त करते हुए - एक बार फ़िर से मार्टिन लूथर किंग और उनकी इस पंक्ति को याद दिलाना चाहता हूं कि --
“अगर आप उड़ नही सकते तो आप दौड़ों,
“अगर आप दौड़ नही सकते तो आप चलो,
और
अगर आप चल नही सकते तो, आप रेंगों......
मगर आगे बढ़ते रहो, अपने लिए, अपने समाज के लिए अपने देश के लिए, और अपनी आज़ादी के लिए.
धन्यवाद.
डाo मोहम्मद अली
janghatfoundation@gmail.com +91- 7903892791
ali2011pf@gmail.com +91- 9334302001
Note :- टंकण संबंधी दोष के लिए क्षमा करें
धन्यवाद ।
Dr. Mohammad Ali
Assistant Professor
Dept. of Philosophy
RLSY College
Patliputra University, Patna.
सामजिक, आर्थिक, राजनैतिक और शैक्षणिक मुद्दों पर लिखे अन्य लेखों के लिए
(Janghat.blogspot.com)



बहुत ही सुंदर लेख है, जिस आज़ादी की आप बात कर रहे हैं , सही मायने में आज़ादी वही है । पर अफ़सोस आज़ादी मिलने के 75 साल बाद भी हम सही मायने में आज़ाद नहीं ।
ReplyDeleteमाशाल्लाह सर ,
ReplyDeleteबहुत ही सुंदर लेख है । इस लेख से बहुत कुछ सीखने, समझने और अपने जीवन को उस पर ढालने की कोशिश करनी चाहिए।
Right sir
DeleteVery nice. Keep writing...
ReplyDeleteSikander Jamil
Thank you so much 💐
Deletesir waki app ki article ko chand alfazon bayan kerna bahut bari gustakhi hogi sir
ReplyDeleteapke lekh ko jitna bar padhen utna naya lagta ha.
sir iska badla mai de nahi sakta but dua jaroor karunga ki app sade o aabad rahen. aameen.....