The Regal Way of "Mr. Ranchhor" -
16 कलाओं से सुसज्जित, हिन्दू धर्म के Royal भगवान - "कृष्ण-जी" का जन्म दिन है आज ! उनका जन्म दिन मनाने में एक अलग ही आनंद है.
सामन्य मनुष्य में पाँच कलाएँ होती है. इस लेख को पढ़ने वाले श्रेष्ठ मनुष्यों में साधारणतः आठ कलाएं हो सकती हैं. यहाँ तक कि - मर्यादा-पुरुषोत्तम “श्री-राम जी” को 12 कलाओं का ज्ञान था मगर भगवान विष्णु के सबसे श्रेष्ठतम अवतार के रूप में अवतरित कृष्ण जी ने सम्पूर्ण 16 कलाओं को अपने अंदर समाहित कर रखा था.
श्री संपदा, भू संपदा, कीर्ति संपदा, वाणी सम्मोहन, लीला, कांति, विद्या, विमला, उत्कर्षिणि-शक्ति, नीर-क्षीर-विवेक, कर्मण्यता, योगशक्ति, विनय, सत्य धारणा, आधिपत्य और अनुग्रह क्षमता समेत 16 कलाओं से परिपूर्ण “कृष्ण-जी” के जन्म दिन पर उनके बारे में कुछ अनूठा और विशेष आपके सामने पेश है :-
कृष्ण जी के व्यक्तित्व की गहराई और विविधता आपको अचंभित कर देगा. गौर-फ़रमाएँ :-
Ø प्रेम ऐसा कि - सागर समा ले हृदय में.
Ø मनमोहक इतने कि - 16000 गोपियाँ दीवानी.
Ø वचन ऐसा कि - पूरे महाभारत में अस्त्र नही उठाया.
Ø दानी ऐसे कि - पूरी सेना विपक्ष को दे दिया.
Ø ज्ञानी ऐसे कि - “गीता” रच डाला.
Ø विनम्रता ऐसी कि - सारथी बन गए.
Ø मुस्कान ऐसी कि - दुनिया दीवानी.
Ø मार्ग-दर्शक ऐसे कि - अर्जुन को 18 दिन तक उपदेश दे दिया.
“कृष्ण-जी” की कुछ बेहतरीन बातें जो धर्म से ऊपर उठ कर सभी के लिए सीखने लायक़
1. Think out of the Box: -
अपनी बहन (सुभद्रा) का प्रेम-विवाह अर्जुन से करवाने के लिए अपने बड़े भाई “बलराम” से उलझ गए । राखी के बंधन का अर्थ बहन को गुंडो से बचाना ही नही बल्कि बहन की मर्ज़ी से शादी करने में साथ देना भी होता है.
(Dis-owner killing वाले भाई-और बाप ध्यान से समझे )
2. A True Example Between Male and Female Friendship: -
(महिला मित्रता का नया आयाम)
दुर्योधन की सभा में अपने “सखी” (द्रोपदी) का उस वक़्त सहयोग करना जब पांडव उसे जुए में हार जाते हैं. द्रोपदी के विवाह के बाद भी वैसे ही दोस्त बनाए रखना जैसा शादी से पहले हुआ करती थे. आज का समाज किसी पुरुष और महिला की मित्रता की रेखा उसके डोली उठने तक ही खींचता है. पर कृष्ण ने मित्रता की परिधि को शादी के बंधन से ऊपर रखने का कार्य किया है.
Note: - “सखी” (शादी के बाद भी) “सखी” बनी रह सकती है ।
3. Team Work: - “सबका साथ-सबका विकास”
Management के छात्र के लिए यह एक lesson की तरह हो सकता है. सब कुछ अकेले कर पाने की ताक़त रखने वाले कृष्ण जी “सामूहिक-कार्य” में विश्वाश रखते थे. जो भी करते थे समूह में करते थे, संघर्ष के दिन हो या मस्ती के पल.
(Note :- लीला का मतलब है - सबके साथ )
4. Everything is Fair in love & War :-
: - पूरे महाभारत में अस्त्र नही उठाएँगे का वचन लेने वाले कृष्ण जी ने भीष्म के ऊपर रथ का पहिया ले कर दौड़ गए.
(Note :-बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश जी ने इनसे बहुत कुछ सीखा है)
5. Clever for Truth: -
: - भीष्म से उनके मौत का तरीक़ा पूछ लेना या द्रोणाचार्य की मृत्यु के लिए स्वाँग रचना.
6. Kingmaker is greater than King:
:- कृष्ण जी न तो मथुरा की गद्दी स्वीकार किए न ही द्वारका का सिंहासन. उन्हें पता है कि - कोई भी व्यक्ति लीडर कुर्सी पा कर नही बल्कि जनता के प्यार हाँसिल करके बनता है. दुनिया जानती है कि - उन्हें राजा बनने के लिए गद्दी या
(Note:-वो कहते हैं न जिसे भगवान मिल जाए वो स्वर्ग की लालसा नही करते)
7. Friendship like anything: -
(दोस्त हो तो कृष्ण जैसा )
कृष्ण और सुदामा की दोस्ती तो याद होगा ही. सुदामा के मुट्ठी भर सूखे चावल के बदले उसे अपना वैभव महल तोहफ़े में देते चले गए.
8. Always ready for Fail Big: -
"रणछोड़" के नाम से प्रख्यात कृष्ण हमें यही सिखला जाते हैं कि -- “प्रतिष्ठा में प्राण गवाँने की कोई ज़रूरत नही” । मामला प्रतिकूल हो तो, “पतली-गली” पकड़ लो अगली बार आएँगे, “जंग और दिल” दोनो जीत कर ले जाएँगे.
धन्यवाद
Dr. Mohammad Ali
Assistant Professor
Dept. of Philosophy
RLSY College, Bakhtiyarpur.
Patliputra University, Patna
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Nice🥰🥰
ReplyDeletekeep sharing your Knowledge like this with us. We are glad that we met because of our teacher. 😊
ReplyDeleteRadhe Krishna
ReplyDeleteकृष्ण जी जैसा वक्त और ज्ञानी इस दुनिया में और फिर कभी नहीं होगा
ReplyDeleteहरे कृष्णा हरे रामा.....
ReplyDeleteबहुत ही सुंदर लिखा गया है।