वर्तमान सामाजिक माहौल में मुसलामानों के लिए कौन सी राह???


                         आजादी से लेकर आज तक इस देश के मुसलमानों ने कई सामाजिक एवं राजनैतिक उतार-चढ़ाव भरे दौर में संघर्ष किया है. वक्त-दर वक्त उन्हें अपने भारतीयता और अपनी नागरिकता  साबित  करने पर मजबूर होना पड़ता रहा  है । इन सब के बावजूद भारतीय मुसलमानों की आँखों में बेहतर जीवन का ख्वाब हमेशा से सजता रहा है। परन्तु आजादी के अमृत महोत्सव (75 साल) काल व्यतीत करने के बाद भी मुसलमान कहाँ और किस हालत में खड़ा है, इसे अल्फाजों मे ब्यान करने की जरूरत नहीं है। 15% से अधिक (लगभग 21 करोड़) की आजादी वाले मुस्लिम समुदाय इस देश में हाशिए पर की जिन्दगी गुजार रहा है। जिसकी तादाद दुनिया भर के मुसलमानों का 10.9% से अधिक हैं। 

 


वर्तमान  सामाजिक माहौल में

मुसलमानों के लिए कौन सी राह???


                मुसलमानों के एक हाथ में कुरान और दुसरे हाथ में कम्प्यूटर  देने का वादा करने वाले इस देश के वर्तमान प्रधानमंत्री के सारे दावे और वादे खोखले साबित होते नजर आ रहे, जब इस देश के  मुसलमानों को दाढ़ी, टोपी, हिजाब और मांस के नाम पर चिंहित करके सरे-आम लिंचिंग कर दिया जा रहा है। "सबका-साथ सबका-विकास'  का नारा देने वाली सरकार की नियत और निति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि - पिछले सात-आठ वर्षों से देश में उठने वाले हर मुद्दे से मुसलमानों को टारगेट किया जा रहा है। 

 

मंदिर-मस्जिद, क्रबिस्तान, शमशान, गाय-गोबर, लव-जेहाद, दाढ़ी-टोपी, आजान-सड़कों पर नमाज, हिजाब, लव-जिहाद, Veg, Non-veg, N.R.C  -C.A.A, अयोध्या - ज्ञानवापी, एंव ताजमहल से कुतुबनीनार तक उठने वाले तामम-मुद्दों के केन्द्र में मुसलमानों की आस्था एंव भावनाओं को सरे-आम घसीटते हुए तार-तार किया जा रहा है। 

 

 विधायिका में बैठे भाजपा के लोग देश की विविधता, मौलिकता एंव समावेशीकरण के खिलाफ जबरन थोपी जाने वाली एकता की पैरवी (वकालत) कर रहें है। न्यायापालिका में बैठे लोग ' न्याय '  को किनारे कर आस्था और भावना के आधार पर फैसले सुनाने को मजबूर हैं। कार्यपालिका में कार्यरत लोग मूकदर्शक बने बैठे हैं और देश की जनता लोकतंत्र के चतुर्थ स्तंभ कहे जाने वाले मीडीया द्वारा फैलाए हुए "हिन्दु-मुस्लिम जहर"  में इस कदर डूब चुकी हैं कि उन्हें देश के हर मामले में 'हिन्दु-मुस्लिम एंगल’ ही  नजर आता है।

 

भाजपा द्वारा सत्ता पर काबिज रहने की इस पूरी प्रक्रिया ने देश में अमन-सकुन और भाइचारे का पूरी तरह ख़ात्मा कर दिया है। इस भयानक स्थिति के पीछे R.S.S  की गहरी साजिश है, जिसका एक ही उद्देश्य है - ' देश को हिंदू राष्ट्र करके देश के OBC एवं SC-ST  के बहुसंख्यक आबादी  को फिर से गुलाम बनाना' .  ये साजिशकर्ता अपने उद्देश्य को पूरा करने हुतु 'अल्पसंख्यकों’ को  टार्गेट कर रहे हैं,  ताकि देश के तमाम OBC एवं SC-ST  समुदाय को 'हिन्दु-मुस्लिम मुद्दों'  में उलझ कर देश के गंभीर मुद्दों से दुर रखा जा सके. 

 

समाधान की तरफ...................

 

 

संक्षेप मे कहें तो इन साजिशकर्ताओं के सपनों और इरादों को तोड़ने और इन्हें काबू करने का एक ही रास्ता है-

 

        इस देश के संविधान को आधार बनाकर देश के सभी वर्गों को आपस में जोड़ने का माहौल बनाया जाए जहाँ गाँधी और मौलाना आज़ाद की चर्चा  हो ।

        इस देश की विविधता को बनाए रखने के लिए मुसलमानों की तरफ से लगातार अमन और भाईचारे का संदेश देते हुए अन्य धर्म एवं वर्ग के लोगों को जोड़ने का प्रयास करना है।

      हम मुसलमान भाइयों एवं बहनों को लगातार संवाद (बातचीत) स्थापित करना है। अमन का संदेश देते हुए तोड़ों नहीं जोड़ों  नीति की अपनाना है।

 

अब, प्रश्न उठता है कि- यह कैसे होगा ?

 

समाधन का तरीका - 'आपस में संवाद स्थापित करना'

 

   इस भयानक समस्या से निपटने के लिएः आज के मुसलमानों को  Prophet Muhammad (PBUH) के निर्देशों पर चलते हुए एक-जुट होकर भाई चारगी और अमन का संदेश देते रहना है।

 

   Prophet Muhammad (PBUH) के समय से ही मस्जिदों में जुमें (Friday) के नामज के दौरान मुसलमानों के विभिन्न(सामाजिक, आर्थिक राजनैतिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक, धार्मिक, एवं सैन्य रक्षा ) समस्याओं पर चर्चा होता रहा है, जिसमें सबकी सहभागिता भी रहता थी और सभी से संवाद भी स्थापित किया जाता था। साफ़ शब्दों मे लिखा गया है कि - 'मस्जिदों को नमाज के अतिरिक्त मुसलमानों के जीवन से जुड़े समस्याओं के समाधान हेतु चर्चा का केन्द्र बनाया जा सकता हैं, और इस्लाम धर्म में रसुल के समय से यह होता आ रहा है। यहाँ तक कि - मस्जिद से शाँति-संवाद स्थापित करने के क्रम में अन्य समुदाय के लोगों को भी आमंत्रित किया जाता है, ताकि इस्लाम में वर्णित-भाईचारे का संदेश सब तक पहुँचें।

 

       आज देश का मुसलमान जुमे (Friday) की नमाज को एक बेहतर मंच (Platform) की तरह इस्तेमाल कर सकता है, जहाँ से शिक्षा, व्यपार, रहन-सहन, एवं गलतफेमली को दूर करने का संदेश दिया जा सकता है। इस मंच से समाज, राजनिति, धर्म, व्यापार, शिक्षा, प्रबंधन, सफाई, ब्यवहार और बेहतर जीवन हेतु आगे की योजना पर आसानी से चर्चा किया जा सकता है 

 

      मस्जिद के इमाम जुमे की नमाज़ से पहले की तक़रीर में इस्लाम में वर्णित सब्र की बातए किरदार का ज़िक्रए अल्फ़ाज़ की सौम्यताए व्यवहार के द्वारा दिल जितने की कलाए सच कहने की हिम्मतए हक़ के साथ खड़े होने की आदत का ज़िक्र करें तो जमीनी-स्तर (गाँव-गाँव) के मुसलमानों के साथ सीधा संवाद स्थापित होगा, और मुसलमानों के एक बड़ा तबका को बेहतर मार्ग दर्शन मिलेगा ।

 

यह कार्य कैसे करेंगे ?

 

       यह कार्य इतना आसान भी नहीं है, इसके लिए एकजुट होकर कार्य करने की जरूरत है। 

 

     देश के तमाम शिक्षित मुसलमानों को एक-जुट होकर सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में तालमेल बिठाना होगा।

 

      धार्मिक रूप से शिक्षित ओलमाओं को, सामाजिक राजनैतिक एवं कानूनी रूप से शिक्षित मुसलमानों के साथ बैठकर आपस में संवाद करना होगा ताकि मस्जिद में तकदीर करने वाले मौलानाओं को विभिन्न समसामायिक मुद्दों पर प्रशिक्षित किया जा सके।

 

     ज़मीनी स्तर नमाज पढ़ने वाले आम-मुसलमान जुमे की नमाज में जिन मौलानाओं को सुनते हैं, उनका लगातार प्रशिक्षण होना जरूरी है तभी वो साफ शब्दों में आम जनता तक अपनी बात पहुँचा सकेंगे।

 

    मस्जिद, चंदा और इस्लाम के नाम पर इकट्ठा किए गए पैसे का ज़्यादा से ज़्यादा इस्तेमाल मुसलामान यूवाओं के शिक्षा एवं लाईब्रेरी पर खर्च करना होगा

 

    जुमे की नमाज़ में थोड़े वक्त के लिए समुदाय के डाक्टर, वकील, प्रोफेसर, शिक्षक, व्यापारी और क़ानून एवं समाज से जुड़े पढ़े लिखे लोगों को बुला कर उनसे तक़रीर करने की गुज़ारिश करनी होगी ताकि मुस्लिम युवाओं को उनके अनुभव का फ़ायदा मिल सके और 

 

    विभिन्न मसलकों में बँटे हुएए मुस्लिम समुदाय को जाति-व्यवस्था से उपर उठकर रोटी-बेटी का संबंध बनाना होगा, जिसका भारतीय मुस्लमान में आभाव है।

 

   समाज एवं समुदाय संबंधी हर बड़े फैसले मस्जिद मे लिए जाए, और उकसा एलान सामुहिक तौर पर जुमे के नमाज के बाद किया जाए। आपसी सहयोग से मुसलमानों को आत्मनिर्भर बनना होगा . 

 

 



डा0 मोहम्मद अली 

पाटलिपुत्रा विश्वविद्यालय, पटना 


Email :-  ali2011pf@gmail.com

Phone:-  +91-7903892791


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