भारत में आर्थिक मंदी का रहस्य भाग - 02

  भारत में आर्थिक मंदी का रहस्य
भाग :- 02


तक़रीबन 1 अड़ब 40 करोड़ भारतीयों को प्रभावित करने वाली इस आर्थिक-मंदी से जुड़े लेख के दूसरे भाग में आपका स्वागत है । 

लेख के दूसरे भाग की शुरुआत से पूर्व एक नज़र पहले भाग पर

(संक्षिप्त चर्चा - प्रथम भाग का )



पहले भाग को पढ़ने के बाद हमें ‘मोटा-मोटी’ यह समझ बनती है कि - 

vभारत में आर्थिक मंदी दूर करने के लिए खपत बढ़ाना होगा, मतलब देश के लोगों को झोला लेकर बाज़ार जाना होगा और अधिक से अधिक सामान ख़रीदना होगा ।
vवर्तमान सरकार ने हर सम्भव प्रयास किया ताकि - देश के नागरिक के जेब में पैसा जाए और वो मार्केट तक जा कर सामान ख़रीदे और देश की मंदी दूर हो सके । फिर भी लोग उस तरह से ख़र्च नही कर रहें हैं और बड़ी कंपनियो से अपना उत्पादन भी कम कर देने का निर्णय ले लिए ।  

लेख की शुरुआत करते हैं :- पिछले लेख के समाप्ति में उठाए गए कुछ प्रश्नों से॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰ 

पिछले लेख में चर्चा किए गए 8 Pointको पढ़ कर हमनें यह समझने की कोशिश किया था कि -  “अर्थव्यवस्था”और “GDP”के बढ़ने के लिए जो तीन महत्वपूर्ण चीज़[ Government Expenditure,Consumption(खपत)and Investment (निवेश) ]  देश में होना चाहिए, सरकार ने उन तीनों चीज़ों को पूरा करने का प्रयत्न किया है । जब सरकार ने सच में ऐसा किया है तो यहाँ पर निम्न प्रशन उठ जाते हैं :- 
जब सरकार ने सब प्रयास किया है तो :- 


Øसरकार से चूक कहाँ हो गयी  ? 
Øजनता के पास पैसा क्यू नही है ?
Øसारा पैसा गया कहाँ  ?
Øअगर जनता के पास “पैसा” है तो वो ख़रीदारी बढ़ क्यू नही रहा है ? ?
Øअभी सरकार को RBI से क्यू इतना पैसा लेना पड़ रहा है, फिर भी ‘आर्थिक-मंदी’ख़त्म क्यू नही हो रही है ? 
Øसरकार ने जो अभी-अभीCorporate Tax में कमी किया है उससे भी सुधार क्यू नही हो रहा है ? 
Øसरकार को अब क्या करना होगा ? 
Øजनता ऐसी स्थिति में क्या करे  ? 
Øऔर ये सारा रहस्य क्या है  ??????

 लेख में आगे इन्ही प्रश्नों पर चर्चा होगी और आर्थिक मंदी को दूर करने के INNOVATIVE उपाय पर भी बात करेंगे ।  


प्रारंभ करते हैं :-   (इस प्रशन के साथ)


प्रशन :-सरकार द्वारा इतने प्रयास के बावजूद भी आर्थिक-मंदी दूर क्यू नही हो रही है ???

उत्तर :-

मेरीसमझ यह कहती है कि - सरकार ने आर्थिक मंदी को कम करने के जितने भी प्रयास किए हैं वो सभी प्रयास भारत देश की विविधता के अनुरूप सटीक नही बैठ रहें हैं । 

एक उदाहरण देता हूँ - 

सरकार ने आर्थिक मंदी दूर करने के क्रम में - Corporate Taxघटा दिया । सरकार ने प्राइवेट कम्पनी को 1॰5 लाख करोड़ रुपयका Corporate Taxकी छूट दिया ।

इसकी पीछे सरकार की क्या मंशा थी (इसे समझे):- 
üइस छूट का फ़ायदा उठाकर निजी कम्पनी उत्पादन बढ़ाएगी । 
üनिजी कमापनी मार्केट में इंवेस्टेमटन बढ़ाएगी । 
üइस छूट को वो प्रोडक्ट के माध्यम से जनता तक ले जाएगी । 
üजनता इस छूट का फ़ायदा उठा कर बाज़ार से सामान ख़रीदना शुरू कर देंगे ।
üइस तरह आर्थिक मंदी कम होने लगेगी ।  

रोचक करने वाली जानकारी :-

पिछले 25साल के इतिहास में पहली बार किसी बजट में सरकार ने निजी कम्पनी को एक साथ इतनी बड़ी छूट दिया है। इससे पहले इतनी बड़ी छूट कभी नही दिया गया था । क्यूँकि ये छूट देने से अंततः सरकार के ख़ज़ाने ही ख़ाली होंगे (जो कि - जनता का पैसा है) । 

इससे पहले 1997 में चितंबरमने Corporate Tax,Exciseand Customऔर Income taxपर भी थोड़ी से छूट दे कर DREAM BUDGETके hero बन गए थे । ऐसी स्थिति में तो - “निर्मला सितारमण”जी के इस फ़ैसले की तो प्रशंसा होनी चाहिए । परंतु ऐसा नही हुआ । 

Corporate Taxके इतनी बड़ी छूट के बाद वास्तव में क्या हुआ (ये जान ले ) :- 

§  शेयर बाज़ार पहले दिन के बढ़त के बाद लगातार नीचे चला गया॰   इतनी बड़ी छूट का कोई सकारात्मक असर बाज़ार पर नही दिखा॰

§  इस फ़ैसले के बाद IMF (International Monetary Fund) MOODY’Sऔर R.B.I तीनो ने यह माना कि - भारत की GDP कम हो जाएगी । 
§  निजी कम्पनी ने इस छूट का लाभ ख़ुद ले लिया । इस लाभ को आगे जनता तक नही भेजा , ऐसा करने से जनता ने बाज़ार जा कर सामान नही ख़रीदा । 
§  निजी कम्पनी की छूट देने से राज्य-सरकार और केंद्र सरकर के खाजने से ये पैसा निकलेगा जो निजी कम्पनी के जेब में जाएगा ।  
§  निजी कम्पनी ने ‘न तो उत्पाद की क़ीमत बढ़ाई और न ही मार्केट में investment किया’जैसी उम्मीद सरकार ने किया था । 
(जनता को इतनी छूट तो दीपावली-छठ में ऐसे ही मिल जाती है)



काम की बात :-

“पूँजी संबंधित कम्पनी”

जैसे - बैंक, टेलीकोम को तो इस छूट का बहुत फ़ायदा मिला पर ये प्रोडक्ट नही बनाती अतः जनता को इससे सीधा फ़ायदा नही मिल सकता है और न ही ये कम्पनी अपने पास मज़दूर बढ़ाती है, अतः यह नए रोज़गार भी नही दे सकती है । अतः सरकार का पूरा छूट इनके जेब में ।  

“श्रम-सम्बंधित कम्पनी” 

जैसे :- वो सभी कम्पनी जो नया उत्पाद बनाती है, उन्हें इस corproteTax छूट का बड़ा फ़ायदा सरकार ने नही दिया । जबकि - ऐसी कम्पनी ही अपना उत्पाद जनता के बीच लाती है और अपने उत्पादन के क्रम में मज़दूर की संख्या भी बढ़ाती है । पर इन्हें छूट का ज़्यादा फ़ायदा नही मिला अतः ये स्थिल रही । 

अतः इससे यह दिखलाई दे रहा है कि - सरकार ने निजी कंपनियो को 1॰5 लाख करोड़का Corporate Taxछूट दे कर अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मार लिया है । 

अलग नज़रिया-  
अब इस चीज़ को थोड़ा उलट कर देखें । किसी भी कम्पनी को अपने Product मार्केट में बेचने के लिए सही मायने में Corporate Taxमें छूट की ज़रूरत है ही नही, क्यूँकि - यदि कम्पनी की पता है कि - उसका प्रोडक्ट मार्केट में धड़ल्ले से बिक रहा है, जनता बाज़ार जा कर सामान ख़रीद रही है तो वो कम्पनी सरकार को Corporate Taxहँसते हुए देगी और उस product पर Corporate Taxके नाम पर 2- 4 रुपय extra बढ़ा देगी । जनता तो फिर भी सामना ख़रीदेगा जिससे कम्पनी का भी फ़ायदा होगा और हर सामान पर जो 2 -4 रुपय आ रहे है वो सरकार के खाजने में जाएँगे । 

तर्क :-
    निजी कंपनियो द्वारा भारत में सबसे ज़्यादा  Investment सन 2000से लेकर 2010 के बीच और उस वक़्त Corporate Tax34 % से लेकर 40 % तक थी ।इसका मतलब कि - निजी कम्पनी के Investment बढ़ाने के लिए Corporate Taxमें छूट दे देना बहुत बड़ी अक़्लमंदी की बात नही है । 

उपाय :-

अतः, सरकार को Corporate Taxमें छूट देने के बजाए इतना पैसा किसी दूसरे तरीक़े से ख़र्च करती या सीधे उत्पादों पर जनता को छूट देती तो शाएद जनता झोला उठा कर बाज़ार पहुँच जाती ।   

सारांश :- 
Corporate Tax वाले एक छोटे से उदाहरण से आप समझ चुके होंगे कि - सरकार ने आर्थिक मंदी को दूर करने के लिए जो क़दम उठाए वो भारत जैसे विविधता वाले देश में सटीक नही बैठता है ।  

सरकार ने इसके अतरिक्त भी कुछ ऐसे ही “तीर-चलाएँ”है जो सरकार की तरफ़ ही वापस मुड़ गया है । 

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हम टुकड़ों में सारी स्थितियाँ, परिस्थितियाँ और मंदी से निकलने के उपाय आप तक ले कर आते रहेंगे । आप धेर्य बनाएँ रखें ।
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लेखक :- डाo मोहम्मद अली  । पाटलिपुत्रा विश्वविद्यालय, पटना ।

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